ड्रॉ के बाद भी अभिभावकों को भरोसा नहीं

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Thursday, March 06, 2014-12:26 AM
नई दिल्ली: नर्सरी दाखिले में शिक्षा निदेशालय की ओर से बनाए गए नए दिशानिर्देशों में बार-बार हो रहे बदलावों से अभिभावक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। परेशान अभिभावक केवल विद्यालयों के चक्कर ही नहीं काट रहे हैं, बल्कि विद्यालयों में चयन सुनिश्चित हो जाने के बाद भी किसी नतीजे पर पहुंच पाने में असमर्थ हैं। अभिभावकों कहना है कि नर्सरी दाखिले को लेकर हर वर्ष मारामारी होती है लेकिन इस बार यह स्थिति और भी बदतर हो गई है।
 
नर्सरी दाखिले में निदेशालय की ओर से बनाए गए दिशा-निर्देशों से अभिभावकों का एक वर्ग संतुष्ट होता है तो दूसरा असंतुष्ट। पहले 8 किलोमीटर के दायरे में आने वाले बच्चों के लिए 70 अंकों को सुनिश्चित किया गया था। बाद में इसमें स्थानांतरण, सिबङ्क्षलग और एल्युमिनाइ के अंकों को जोड़ दिया गया, जिससे वे बच्चे पीछे रह गए, जो इस दायरे में नहीं आते हैं। इसके बाद दिशानिर्देशों को फिर से बदलकर उसमें से स्थानांतरण के अंकों को निरस्त कर दिया गया। 
 
अभिभावकों का कहना है कि इस तरह बार-बार होने वाले बदलावों से बच्चे के चयन हो जाने के बाद भी अभिभावक यह सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं कि उस विद्यालय में उनका बच्चा पढ़ पाएगा या नहीं। उनके मुताबिक हर बार लक्की ड्रॉ को लेकर मारामरी होती थी लेकिन इस बार नियमों में बार-बार के होने वाले बदलावों के मद्देनजर यह स्थिति और भी बदतर हो रही है। दिलशाद गार्डन निवासी अमित कुमार ने बताया कि दिशा निर्देशों में हो रहे बदलाव के कारण अभिभावकों में एक ओर भ्रम की स्थिति बनी है, वहीं विद्यालय में लगातार चक् कर लगाना भी बेहद मुश्किल हो रहा है।
 
वहीं विवेक विहार निवासी रजनी ने बताया कि कई विद्यालयों में ड्रॉ के दौरान नाम आ जाने के बाद भी यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि बच्चे का दाखिला होगा कि नहीं। पता नहीं कब नए नियम आ जाएं।
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