दिल्ली में नर्सरी एडमिशन, चर्चा विदेशी अखबारों में

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Thursday, March 06, 2014-12:52 AM
नई दिल्ली : दिल्ली के नर्सरी एडमिशन की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को फिर से शिक्षा विभाग से जवाब मांगा है। विभाग को वीरवार को 70 प्वाइंट पर बनी लिस्ट रद्द करने पर जवाब देना है लेकिन तब तक दूर देशों के लिए यह एक रोचक खबर बनी हुई है। 
 
विदेशों के प्रमुख अखबार पूरी दिलचस्पी के साथ दिल्ली की खबर को रोचक बनाकर चीन, इंग्लैंड और कतर के लोगों को परोस रहे हैं। साऊथ चाइना मॉॄनग पोस्ट ने इसी हफ्ते अपने एक अंक में लिखा है, दिल्ली का अब्राहम अगर अमेरिका की एक यूनिवॢसटी में एडमिशन के लिए अप्लाई करता तो दिल्ली के मुकाबले दोगुना चांस बनता। अगर उसकी इतनी उम्र होती।
 
अब्राहम की मां के हवाले से लिखा गया है कि बच्चे को एक साल से नर्सरी में एडमिशन के लिए तैयारी करवाया जा रहा है। उसकी मां संगीता ने उस अखबार को कहा है कि 3 साल तक बच्चा पैंसिल नहीं पकड़ पा रहा है। नहीं तो पहले से तैयारी  करवाई जाती। हालांकि यह दूसरी बात है कि दिल्ली में नर्सरी में एडमिशन बच्चे की क्षमता नहीं बल्कि उसे हासिल प्वाइंट के आधार पर मिल रहा है। चाइना पोस्ट की तरह की इंग्लैंड का द गाॢजयन और कतर का गल्फ टाइम्स के दिल्ली के इस खबर को प्रमुखता से जगह दी। 
 
गल्फ टाइम्स रिपोर्ट में कहता है, दिल्ली में स्कूल की कमी इस कदर है कि पैरेंट्स के बच्चे जब गोद में ही होते हैं तो उनकी टैंशन बढऩे लगती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1300 प्राइवेट स्कूल और 16 मिलियन आबादी के कारण दिल्ली स्कूलों की भारी क्राइसिस झेल रहा है।
 
एक दूसरी विदेशी वैब पोर्टल अपनी रिपोर्ट में कहता है कि बीते सालों में पैरेंट्स ने बच्चों के एडमिशन के लिए रिश्वत भी चुकाई है। एक पिता ने अपनी बेटी के एडमिशन के लिए  पिं्रसिपल से कहा कि वे तब तक उनके कपड़े ड्राई क्लिनिंग में धोते रहेंगे जब तक बच्ची पढ़ती रहे। पैरेंट्स के स्कूल को स्कूल बस डोनेट करने के किस्से भी रिपोर्ट में हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में पर्याप्त टॉयलेट की सुविधा का न होने की बात लिखी गई है। 
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