दिल्ली में पहली बार कांग्रेस बनाम भाजपा नहीं

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Thursday, March 06, 2014-1:07 AM
नई दिल्ली (अशोक शर्मा): लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गया है। दिल्ली की 7 सीटों पर आप ने 5 उम्मीदवारों को पहले ही मैदान में उतार रखा है, जबकि कांग्रेस और भाजपा के नेता चुनावी संग्राम में उतारे जाने वाले योद्धाओं की खोज में जुटे हैं लेकिन वर्तमान स्थिति में दिल्ली में पहली बार मुख्य मुकाबला भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं होगा। इस बार भाजपा और आप आमने-सामने हैं। 
 
देखने वाली बात यह होगी, कि दिल्ली में भाजपा के पी.एम. इन वेटिंग नरेंद्र मोदी की हवा का फायदा मिलेगा या अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को। क्या कांग्रेस एक सीट पर भी कब्जा कायम रखी पाएगी, इस पर फिलहाल संदेह लग रहा है। लोगों का तो यहां तक कहना है कि ऐसी स्थिति के लिए कांग्रेस खुद ही जिम्मेदार है।
 
 भाजपा को आगे बढऩे से रोकने के लिए कांग्रेस ने बेशक आप को समर्थन देने का फैसला लिया लेकिन वह कदम ही कांग्रेस के लिए भस्मासुर साबित हो रहा है। दिल्ली में हुए विधानसभा के चुनाव में पहली बार  मैदान में उतरकर आप के 28 उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि कांग्रेस 43 से सिमटकर केवल 8 सीटों पर कब्जा कायम रख सकी।
 
भाजपा 32 सीट जीतकर नम्बर एक जरूर रही लेकिन सरकार बनाने से उसकी हसरत पूरी नहीं हो सकी। इसके अलावा कई सीटों पर आप और भाजपा के उम्मीदवारों को कुछ ही मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं कुछ सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस तीसरे और कुछ जगहों पर उसके प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई थी।
 
16वीं लोकसभा के लिए होने वाले चुनाव में दिल्ली की 7 सीटों पर मतदान 10 अप्रैल को होगा। कांग्रेस के उम्मीदवार करीब-करीब तय हैं लेकिन कांग्रेस फिलहाल उनके नामों की औपचारिक घोषणा करने से घबरा रही है। पार्टी की अंदरूनी स्थिति को देखते हुए ऐसा नहीं लग रहा कि दिल्ली में किसी भी सांसद का टिकट काटा जाएगा।
 
पार्टी के कार्यकत्र्ता ही इस बात को कह रहे हैं कि बेशक पार्टी के नेता राहुल गांधी प्राइमरी प्रोसैस के अंतर्गत दिल्ली में 2 सीटों रायशुमारी करवा रहे हैं लेकिन कहीं ऐसा न हो कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले उम्मीदवारों के चयन को लेकर की गई घोषणाओं की तरह से यह प्रक्रिया भी केवल कागजी साबित न हो जाए। 
 
याद रहे कि उस दौरान पार्टी के नेताओं ने एक दर्जन विधायकों को दोबारा टिकट नहीं दिए जाने की बात कही गई थी लेकिन सभी ने चुनाव लड़ा और सभी हार गए।
चुनाव में कांग्रेस को जबर्दस्त आघात पहुंचा। आप सरकार से समर्थन वापिस लेने के बाद से कांग्रेस का ग्राफ गिरा है। अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मध्यमवर्गीय मतदाताओं का रूख आम आदमी पार्टी की तरफ से कुछ बदला सा लगता है, जबकि दूसरी ओर निचले तबके के यानी अनधिकृत कालोनियों और पुनर्वास बस्तियों में रहने वाले लोगों की नजर में आज भी केजरीवाल की तरफ झुकाव है। 
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