सारे फर्जी फिर भी नहीं हुआ कोई फेल

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Thursday, March 06, 2014-2:12 AM
नई दिल्ली(सतेन्द्र त्रिपाठी/कुमार गजेन्द्र): सहकारी बैंक में एक बड़े घोटाले के सामने आने के बाद रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। बैंक के ही कुछ अधिकारी और पदाधिकारियों की मिलीभगत से जिन फर्जी लोगों को लोन जारी कर दिए गए थे, उनकी सिक्योरिटी  के रूप में लिए सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं।
 
यहां तक की इंकम टैक्स रिटर्न और प्रापर्टी के पेपर भी फर्जी पाए गए हैं, जिन्हें सिक्योर्टी के रूप में लोन के पेपरों के साथ लगाया गया था। 
सूत्रों की मानें तो जिन लोन को दलालों के जरिए पास करवाया गया था, उनमें 25 से 50 फीसदी का कमीशन लिया गया।
 
कमीशन का हिस्सा अधिकारियों से लेकर पदाधिकारियों तक में बंटता था। जिन सरकारी और गैर सरकारी लोगों को फर्जी तरीके से लोन जारी  किए गए थे, बैंक के लोगों ने मिलीभगत कर उनकी सैलरी स्लिप तक फर्जी तरीके से तैयार कर दीं, जिसकी सैलरी 20 हजार थी  बढ़ाकर उसे 35 से 40 हजार तक की दिया गया। जिन लोगों को फर्जी तरीके से लोन जारी किए गए थे वह अब सभी लोग गायब हो चुके हैं। वह लोग कहां गायब  हो गए, मर गए या फिर जिंदा हैं, यह कोई नहीं जानता। 
 
पीड़ितों का कहना है कि एक दलाल ग्यासी राम पहले ही 2 स्थानों (लाजपत नगर और प्रीतमपुरा) पर बैंक का सदस्य बना हुआ था लेकिन उसने फर्जी तरीके से लोन करवाने के लिए करावल नगर ब्रांच में एक बार फिर से मैंबरशिप हासिल की और लाखों रुपए का लोन पास करवा लिया लेकिन जब तक वह रकम वसूल पाता बैंक मैनेजर को ग्यासी राम के इस फर्जीवाड़े की भनक लग गई। उन्होंने इस लोन को              रोक दिया। 
 
हैरान कर देने वाली बात यह भी है कि बैंक में हुए इस फर्जीवाड़े की शिकायत पीड़ितों ने रिजर्व बैंक, रजिस्ट्रार कॉपरेटिव सोसायटी (आर.सी.आर.) को भी दे दी थी लेकिन आज तक उनकी ओर से बैंक को न तो किसी तरह के एक्शन लेने के आदेश दिए गए और न ही किसी तरह के दिशा-निर्देश दिए गए। हालांकि बैंक के चयरमैन जयभगवान समेत कई पदाधिकारियों ने इस मामले में जांच करवाने की बात जरूर कही जा रही है।  
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