अन्ना ने स्वीकारा, एक समय वह भी करना चाहते थे आत्महत्या

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Thursday, March 06, 2014-11:23 AM

इंदौर: वरिष्ठ समाज सेवी अन्ना हजारे की जिंदगी में एक दिन ऐसा आया था कि वह भी आत्महत्या करने के लिए सोचने लगे थे। इस प्रकार के विकार को दूर करने के लिए उन्होंने किताबों का सहारा लिया। अन्ना ने स्वामी विवेकानंद की किताब पढऩा शुरू किया और स्वामी जी के विचारों से प्रेरित होकर 25 साल की उम्र में पूरी तरह समाज और देश की सेवा का प्रण ले लिया। यह खुलासा स्वयं अन्ना हजारे ने शहर में हुए एक समारोह में किया।


पूरा पागल ही कर सकता है देश सेवा:-
उन्होंने कहा कि देशसेवा के लिए पूरी तरह पागल होना पड़ता है। पूरा पागल व्यक्ति ही देश सेवा कर सकता है। आज लखपति और करोड़पतियों की कोई जयंती नहीं मनाता, लेकिन झोपड़ी में रहने वाले समाजसेवी की जयंती मनाई जाती है। जो आनंद रात को सोते समय और जिंदगी को जीते हुए करोड़पतियों को नहीं मिल रही है, वह सब कुछ त्याग करने के बाद मैं महसूस कर रहा हूं। लोग जिंदगी भर मेरा-मेरा करते हुए सुबह चार बजे से रात दस बजे तक दौड़ते रहते हैं। वे लेकर कुछ नहीं आते है और ना ही जाते हैं। फिर भी मेरा-मेरा करते हुए दिन भर सिर पर गठरी लिए दौड़ते रहते हैं।


घूस लेने वाला जीते जी मर जाता है:-
घूस लेने के लिए जो जीते हैं, वह वास्तव में मर जाते हैं और जो समाज के लिए मर रहे हैं, असलियत में वही जिंदगी जी रहे हैं। देश बहुत बड़ा है, लेकिन जो व्यक्ति अपने पड़ोसी, समाज, गांव, शहर की सेवा कर रहा है, वह भी अपने देश की ही सेवा कर रहा है।

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