घर बैठे डिग्री पाने का लालच हो सकता है खतरनाक

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Thursday, March 06, 2014-11:16 PM
नई दिल्ली : दसवीं फेल बारहवीं करें या फिर 3 साल का डिग्री कोर्स करें महज 1 साल में। इस तरह के विज्ञापनों से जरा बचें। क्योंकि दिल्ली में कुछ ऐसे गैंग सक्रिय हैं जो इस तरह के विज्ञापन देकर फर्जी सार्टिफिकेट और मार्कशीट देकर छात्रों को लूट रहे हैं। 
 
पूर्वी जिला के ए.ए.टी.एस. की टीम ने ऐसे ही गैंग का पर्दाफाश किया। जिसके 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की पहचान रामदेव, अतुल, सबिया, पवित्र सिंह और जितेन्द्र को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से विभिन्न संस्थाओं के 631 खाली सार्टिफि केट,दिल्ली बोर्ड  ऑफ सीनियर सैकेंडरीआदि संस्थानों के होलोग्राम स्टिकर,21 मोहरे,और एक लेपटोप बरामद किया है।  आरोपी महज 5 हजार से 1 लाख 20 हजार रूपये में फर्जी सर्टिफिकेट देने में लगे हुए थे।    
     
पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि मुजफ्फरनगर निवासी अक्षय ने पुलिस को शिकायत की थी कि उसने 12 वीं पास करने के लिए रामदेव नाम के शख्स से संपर्क किया जिसने उससे सर्टिफिकेट देने के नाम पर दो किस्तों में तीस हज़ार रूपये वसूल लिए। इतना ही नहीं रामदेव ने उससे मार्कशीट देने के लिए 12 सौ रूपये और वसूल लिए।
 
बाद में जाँच करने पर पता लगा कि उक्त मार्कशीट फज़ऱ्ी थी। इस बाबत पीड़ित ने न्यू अशोक नगर थाने पर मामला दर्ज किया गया। मामले की गम्भीरता को देखते हुए जिले के एए टीएस स्टॉफ को भी पड़ताल में लगाया गया था।
 
पीड़ित से मिली जानकारी के बाद प्राथमिक जांच पर रामदेव को गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी निशानदेही पर मीरा रोड,मुम्बई निवासी सबिया खान को गिरफ्तार किया। पूछताछ पर पता चला कि सर्टिफिकेट जालंधर पंजाब निवासी बलविंदर बाजवा और पवित्रा सिंह बनाते हैं। पवित्रा और जितेन्द्र पकडऩे के बाद मौके पर से भारी मात्रा में फर्जी सार्टिफिकेट और मार्कशीट आदि बरामद की।
 
बताया जाता है कि  पवित्र, जितेन्द्र और बलविंदर ने पंजाब के जालंधर में स्टाइल ऑफ आईसीएस एजुकेशन के नाम से एक दफ्तर खोला हुआ था। इन्होंने डिग्री सर्टिफिकेट दिलाने वाले युवकों को लाने के लिए कमीशन एजेंट्स रखा हुआ था। पहली किस्त वसूलने के बाद यह पीड़ित को सर्टिफिकेट की स्कैन कॉपी दिखा देते थे, बाद में  पूरी रकम वसूलने के बाद कुरियर से एजेंट्स के हवाले से जाली सर्टिफिकेट भेज देते थे। मुबई की सबिया खान ही अकेली वो महिला थी जो काफी सारे एजेंट्स के संपर्क में रहती थी।
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