डॉक्टरों ने अस्थायी तौर टाली हड़ताल

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Friday, March 07, 2014-1:57 AM
नई दिल्ली : कानपुर की घटना के बाद इंडियन मैडीकल एसोसिएशन के आह्वान पर बुलाई गयी देशव्यापी हड़ताल वीरवार की सुबह ही वापिस ले ली गयी लेकिन दिल्ली में हड़ताल का मिलाजुला असर देखा गया।
 
कहीं किसी अस्पताल में डॉक्टरों ने दोपहर बाद कुछ समय के लिए ओ.पी.डी. चालू कर दी तो वहीं कई अस्पतालों में डॉक्टरों ने पूरे दिन ओ.पी.डी. को बंद रखा। राजधानी में ओ.पी.डी. बंद होने की वजह से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल वापसी की घोषणा के बाद भी सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिग, जी.टी.बी. और बाड़ा हिंदू राव अस्पताल में रेजिडैंट डॉक्टरों ने ओ.पी.डी. में पूरे दिन हड़ताल रखी। 
 
हड़ताल की वजह से प्रभावित रही ओ.पी.डी. सेवा : आई.एम.ए. व रेजिडैंट डॉक्टरों द्वारा बुधवार को हड़ताल की घोषणा से निजी अस्पतालों के अलावा सफदरजंग, लेडी हार्डिग, बाड़ा हिंदू राव व जी.टी.बी. जैसे सरकारी अस्पतालों में ओ.पी.डी. सेवा प्रभावित रही। आई.एम.ए. ने सुबह करीब 11.30 बजे हड़ताल वापस लिए जाने की घोषणा की। यह जानकारी सभी अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाने के कारण असमंजस की स्थिति रही। इस वजह से सरकारी अस्पतालों में पूरे दिन ओ.पी.डी. सेवा प्रभावित रही।
 
आई.एम.ए. के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. नरेंद्र सैनी ने आई.एम.ए. मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कानपुर में जी.एस.वी.एम. मैडीकल कॉलेज के छात्रों की पिटाई के विरोध में की गई हड़ताल हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए समाप्त की जा रही है लेकिन इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की भूमिका निराशाजनक रही है। वहां की सरकार अभिमानी है। 
 
आई.एम.ए. के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार पर सामाजवादी पार्टी के विधायक इरफान सोलंकी को बचाने का आरोप लगाया। डॉ. सैनी ने कहा कि हाईकोर्ट ने घटना की न्यायिक जांच कराने और 3 सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। 
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