...एक और दामिनी बनी हौसले की मिसाल

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Friday, March 07, 2014-11:15 AM

रायपुर: हौसले हो बुलंद तो आप दुनिया को झुका सकते है, यह बात छत्तीसगढ़ की एक छात्रा दामिनी ने सच कर दिखाई है। दामिनी बंजारी माता स्कूल की 10वीं क्लास की स्पेशल स्टूडेंट है। पढ़ाई में तेज दामिनी ने पेंटिंग कंपटीशन में राज्य स्तर पर कई पुरस्कार जीते हैं। दामिनी के हौसले और हुनर को देखकर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल को अपने स्कूल के नियमों को बदलना पड़ा।

दरअसल, बचपन से ही दामिनी के दोनों हाथ नहीं है, वो अपने पैर के अंगूठे और उंगली के बीच पेन फंसाकर लिखती हैं। परंतु एग्जाम के समय पेपर करने के दौरान उसकी लिखने की स्पीड कम होने के कारण दामिनी ने एक्स्ट्रा टाइम मांगा था, परंतु उसे मना कर दिया गया।
लेकिन दामिनी किसी और से पेपर लिखवाने की जग खुद ही एग्जाम देना चाहती थी।

इसलिए उसने स्कूल के प्रिंसीपल से इस संबंध में बात की, जो उसे लेकर मंडला कार्यालय गए और उसे दामिनी का केस बताते हुए उसे एक स्पेशल केस की तरह ट्रीट करने की बात कही। जिसके उपरांत इसे एक स्पेशल केस की तरह देखते हुए दामिनी 10वीं की परीक्षा में पेपर लिखने के लिए 60 मिनट ज्यादा देने का निर्णय लिया गया। दामिनी के हुनर और हौसले को देखकर स्कूल को अपना निर्णय बदलना पड़ा। दामिनी ने ऐस कई बच्चों को लिखना सिखाया है, जिनके हाथ नहीं है।

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