पुलिस का कारनामा: मारपीट का मामला 10 वर्ष बाद दर्ज

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Friday, March 07, 2014-9:47 PM

लालगंज/रायबरेली: उत्तर-प्रदेश पुलिस की कार्यशैली किसी से छिपी नहीं है। थाने में आए मामलों का निस्तारण करने के बजाय पुलिस या तो मामले को रफा-दफा करने के जुगाड़ में लग जाती है या फिर मामला दर्ज ही नहीं किया जाता और कभी-कभी तो इसी में कई साल लग जाते हैं। जाहिर है, ऐसे में जब वर्षों बाद मामला दर्ज होगा तो विवेचना के दौरान भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा और पुलिस द्वारा विवेचना पूरी करने और उसके बाद अदालत से मुजरिम का दोष साबित होते-होते और भी लंबा वक्त लग जाएगा। ऐसे में ‘देर से मिला न्याय भी अन्याय के बराबर होता है’ की दलील सही साबित हो जाती है।

ऐसा ही कुछ ताजा मामले में साबित हुआ है, जिसमें मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर पुलिस ने 10 वर्ष बाद घर में घुसकर मारपीट करने का मामला दर्ज किया है। कोतवाली क्षेत्र के ईश्वरीयगंज मजरे खजूरगांव निवासी फूलमती पत्नी शिवनाथ ने मानवाधिकार आयोग लखनऊ को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि 2 दिसंबर 2003 की शाम 5 बजे गांव के ही रामू यादव पुत्र रामपाल व रामपाल पुत्र बृजलाल रंजिशन उसके घर में घुस गए और उसके साथ मारपीट की। इस दौरान उसके दांत टूट गए थे।

मामले की शिकायत पीड़िता ने पुलिस से की थी लेकिन कोई कारवाई न होने पर उसने पुलिस अधीक्षक से भी मामले की शिकायत की थी। फिर भी मामले के आरोपियों के खिलाफ कारवाई नहीं की गई, जिसके बाद से आरोपी उसे लगातार जान से मारने की धमकी देते रहे। थक-हार कर महिला ने मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग से की। आयोग के निर्देश पर शुक्रवार को कोतवाली पलिस ने संबधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। इस बाबत कोतवाली प्रभारी अमर सिंह रघुवंशी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कारवाई की जाएगी।

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