जानिए, आखिर क्यूं इस बास्केटबॉल खिलाड़ी को देख हैरानी होते हैं लोग

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Sunday, March 09, 2014-4:24 PM

रायपुर: हमारे देश के मध्यमवर्गीय परिवार में लड़कियों की हाइट कम होना या बहुत ज्यादा होना, दोनों ही माता-पिता को चिंतित करते हैं कि शायद लड़की को शादी के लिए कोई लड़का नही मिलेगा। वहीं लड़कियों के लिए भी ऐसी किसी स्थिति का सामना करना एम्बेरेसिंग होता है जब हर कोई पलट-पलट कर उसे ही देखता है, उसे देखते ही लोग आश्चर्य करने लगते हैं। छत्तीसगढ़ टीम की बास्केटबॉल प्लेयर पूनम चतुवेर्दी को शुरू में उसकी हाइट की वजह से ऐसी सिचुएशन का सामना करना पड़ता था। लेकिन आज उसकी ऊंचाई ही आज उसकी कामयाबी की सबसे बड़ी वजह बनी है।

6 फीट 11 इंच की पूनम एशिया की सबसे लम्बी बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं, वे अब तक कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में छत्तीसगढ़ और भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। अब पूनम का लक्ष्य भारत की सीनियर इंटरनेशनल टीम में जगह बनाना है। जिसके लिए उनके कोच राजेश पटेल उन्हें खेल की बारीकियां सिखा रहे हैं और उसकी खामियों को दूर करने के लिए लगातार ट्रेनिंग दे रहे हैं। एक छोटे शहर से बास्केटबाल खेलने विदेशों तक का पूनम का सफर काफी रोमांचक है।

आइए जानते हैं पूनम के अब तक के सफर के बारे में:-

यूपी के कानपुर में जन्मी पूनम के पिता श्रीराम चतुवेर्दी उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल हैं। पूनम तेरह साल की उम्र में उनसे लम्बी लगने लगी थी। मध्यम वर्गीय परिवार के माता-पिता की बेटी के बढ़ते कद की वजह से चिंता बढऩे लगी कि इसका क्या होगा। श्रीराम चतुवेर्दी कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि इसे स्पोट्र्स में डाल दो, इतनी हाइट का वहां बहुत फायदा होगा। इसके बाद पूनम को कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम के स्पोट्र्स हॉस्टल में डाला गया, जहां से उसे आगरा स्पोट्र्स हॉस्टल भेजा गया। पूनम की हाइट को देखते हुए उसके कोच ने उसे बास्केटबाल टीम में जगह दी।

कुछ महीनों बाद 2010 में उत्तर प्रदेश की टीम को छत्तीसगढ़ के राजनांद गांव में एक मैच खेलने के लिए आमंत्रित किया गया, उस टीम में पूनम का चयन किया गया। राजनांद गांव में हुए मैच में छत्तीसगढ़ वीमेन टीम के कोच और भिलाई स्टील प्लांट के डिप्टी स्पोट्र्स मेनेजर राजेश पटेल की नजर$ उस पर पड़ी, उसे देखते ही उन्हें लगा कि यह लड़की कुछ कर सकती है। उसके बाद उन्होंने पूनम के घरवालों से बात की, उन्हें कन्विन्स किया कि अगर वे पूनम को ट्रेनिंग के लिए भिलाई स्थित अकादमी में भेजते हैं तो पूनम स्पोट्र्स में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। काफी समय के बाद पूनम के घरवाले उसे भेजने को राजी हुए और पूनम ट्रेनिंग के लिए भिलाई आ गई।

कानपुर में स्पोट्र्स हॉस्टल ज्वाइन करने से पहले पूनम को किसी भी प्रकार की फिजिकल ट्रेनिंग नहीं मिली थी, जिसकी वजह से भिलाई अकादमी में में पूनम के शुरूआती दिनों में उसके प्रैक्टिस के दौरान उसे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन कोच राजेश पटेल ने पूनम पर अपना विश्वास बनाये रखा। उसे एक्स्ट्रा कोचिंग दी और उसके खेल को सुधारने के लिए लगातार मेहनत करते रहे। जून 2011 में पूनम को नागपुर में हुए यूथ नेशनल चैंपियनशिप में अपना दम दिखाने का मौका मिला। यह उसका पहला ऑफिशियल टूर था जिसमें उसे छत्तीसगढ़ की टीम में शामिल किया गया।

इस मैच में छत्तीसगढ़ ने दूसरा स्थान प्राप्त किया जिसके बाद पूनम को भारत के अंडर-16 की संभावित टीम में शामिल किया गया। उसके बाद पूनम में पीछे मुड़कर नहीं देखा, भारत की यूथ इंटरनेशनल टीम में खेल चुकी पूनम का लक्ष्य अब सीनियर इंटरनेशनल टीम में जगह बनाना है। हाल ही में दिल्ली में आयोजित 64वे नेशनल टूनार्मेंट में छत्तीसगढ़ की महिला बास्केटबाल टीम ने स्वर्ण हासिल किया है। 5 मार्च को खेले गए फाइनल मैच के सेकंड क्वार्टर में टीम की कप्तान सीमा सिंह को फाउल की वजह से मैच से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद भी टीम का उत्साह बना रहा। पूनम ने अपनी लम्बाई का फायदा उठाते हुए विरोधी रेलवे की

टीम को पॉइंट बनाने से रोका और छत्तीसगढ़ की टीम सोना जीतने में कामयाब हो गई। पूनम का कहना है कि भारत की सीनियर इंटरनेशनल टीम में जगह बनाने के लिए अभी बहुत मेहनत करनी है। कई वीक पॉइंट्स हैं जिन पर काम करना है। पूनम के कोच राजेश पटेल का मानना है कि पूनम में देश की बेस्ट बास्केटबॉल खिलाड़ी बनने की काबिलियत है। जरूरत है तो उसके टैलेंट को निखारने की। आज जब छत्तीसगढ़ की टीम ने राष्ट्रीय स्पर्धा में गोल जीता हैं तब पूनम फिर से एक बार चर्चा में है।
 

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