Subscribe Now!

उम्र कैद में बदली 5 लोगों की फांसी

  • उम्र कैद में बदली 5 लोगों की फांसी
You Are HereNcr
Monday, March 10, 2014-12:04 AM

नई दिल्ली :  दिल्ली उच्च न्यायालय ने पति के भाई की 2008 में गोली मार कर हत्या करने के जुर्म में पत्नी के परिवार के पांच सदस्यों की मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया है।

न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की पीठ ने हालांकि हत्या के अपराध में अभियुक्तों को दोषी ठहराने का निचली अदालत का निर्णय सही ठहराया लेकिन उनकी मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया। न्यायालय ने शाहीन जरगाम अली, साजिद वसीम, शब्बीर कासिम और शाहीन अब्बास की सजा उम्र कैद में तब्दील करते हुये कहा कि इनका अपराध दुर्लभतम अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि हत्या की यह वारदात झूठी शान की खातिर हत्या का मामला नहीं है जैसा निचली अदालत ने कहा है।

न्यायालय ने मृतक के भाई की हत्या के प्रयास के जुर्म में इन सभी को दस दस साल की कैद की सजा देने के निचली अदालत के फैसले को भी बरकरार रखा है। न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘तथ्यों और परिस्थितियोंं के मद्देनजर पेश मामले को संभवत: झूठी शान की खातिर हत्या का मामला नहीं माना जा सकता है। यह वारदात अभियोजन की गवाह युवती के विवाह के डेढ़ साल से भी अधिक समय बाद हुई। दोनों परिवार एक ही इलाके में रहते हैं। इसके बावजूद ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह पता चले कि 7 जुलाई, 2008 से पहले दोनों के बीच किसी प्रकार का झगड़ा हुआ था।

न्यायाधीशों ने कहा कि न्यायालय की सुविचारित राय में मौजूदा मामले को दुर्लभतम की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता जिसके लिये किसी भी अभियुक्त को मौत की सजा दी जाये। उपरोक्त कारणों से न्यायालय प्रत्येक अभियुक्त की मौत की सजा की पुष्टि करने से इंकार करता है। प्रत्येक अभियुक्त को सजा देने के आदेश में सुधार करके उन्हें उम्र कैद की सजा दी जाती है।’’उच्च न्यायालय ने मौत की सजा की पुष्टि के लिये भेजे गये मामले और अभियुक्तों की अपील पर यह फैसला सुनाया।

अपना सही जीवनसंगी चुनिए| केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन

Recommended For You