‘पिंजरे में बंद तोता’ नहीं हैं न्यायाधीश: अदालत

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Monday, March 10, 2014-9:52 PM

नई दिल्ली: रेलवे में पद के बदले में 10 करोड़ रूपये की घूस के मामले में सीबीआई पर पूर्व रेल मंत्री पवन कुमार बंसल को ‘किसी मकसद से’ छोड़े जाने के आरोप को खारिज करते हुए एक विशेष अदालत ने आज कहा कि ‘न्यायाधीश पिजड़े में बंद तोता नहीं हैं और अदालतें डाक घर की तरह काम नहीं करतीं।’  विशेष सीबीआई न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा ने कहा, ‘‘भ्रष्टाचार के मामलों से निपटते समय ऐसे आदेश पारित करना उचित और विवेकपूर्ण होगा जिससे समाज में कड़ा संदेश जाए कि न्यायाधीश पिजड़े में बंद तोता नहीं है और न्यायपालिक बिना किसी डर या दबाव के काम करती है।’’

अदालत ने गैर सरकारी संगठन ‘डेल्ही प्रदेश सोशल प्रोग्रेश सोसायटी’ (डीपीएसपीएस) की उस याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की जिसमें सीबीआई को बंसल की भूमिका की आगे जांच करने का आदेश दने की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जांच एजेंसी ने किसी मकसद से उनकी भूमिका की जांच नहीं की। यह याचिका पिछले साल 30 नवंबर से निपटारे के लिए लंबित थी। इसमें यह भी आरोप लगाया गया था कि मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की ओर से तत्कालीन रेल मंत्री बंसल के फोन का इस्तेमाल किया गया था। मामले में बंसल के भांजे विजय सिंगला को भी गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई ने पिछले साल जुलाई में आरोप पत्र दाखिल करके 10 लोगों को आरोपी बनाया था।

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