पिंजरों में बंद तोते नहीं हैं जज : स्पेशल कोर्ट

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Monday, March 10, 2014-10:13 PM

नई दिल्ली :जज पिंजरे में बंद तोते नहीं है और न ही कोर्ट जांच एजेंसी के लिए पोस्ट ऑफिस की तरह काम करती हैं। यह टिप्पणी दिल्ली की एक विशेष कोर्ट ने उस आरोप पर की है,जिसमें कहा गया था कि रेलवे रिश्वत मामले में सी.बी.आई ने जानबूझकर पूर्व रेलवे मंत्री पवन कुमार बंसल को बख्श दिया है।

विशेष जज स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि जब भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई की जाती है तो यह बुद्धिमानी होती है कि ऐसा आदेश दिया जाए जो समाज में सही संदेश दे। चूंकि जज पिंजरे में बंद तोते नहीं हैं और इस देश की अदालतें स्वतंत्रता से काम करती हैं। इसी के साथ अदालत ने एन.जी.ओ दिल्ली प्रदेश सोशल प्रोग्रेस सोसायटी की तरफ से दायर अर्जी को खारिज कर दिया है। 

अदालत ने कहा कि इस अर्जी में कोई तथ्य नहीं है और इस मामले में पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं। इस एन.जी.आ ने अपनी अर्जी में मांग की थी कि सी.बी.आई को निर्देश दिया जाए कि इस ाममले में पूर्व रेलवे मंत्री की भूमिका की जांच की जाए। आरोप है कि एजेंसी ने बंसल की भूमिका की इस मामले में जांच नहीं की हैं।

 इस मामले में सी.बी.आई ने पिछले साल जुलाई में पूर्व रेलवे मंत्री के रिश्तेदार सहित दस के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इस मामले में रेलवे बोर्ड में सदस्य की नियुक्ति के तौर पर दस करोड़ रुपए रिश्वत के लेन-देन का आरोप है।

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