1952 से अब तक चुनाव खर्च में 20 गुणा की बढ़ोत्तरी

  • 1952 से अब तक चुनाव खर्च में 20 गुणा की बढ़ोत्तरी
You Are HereNational
Tuesday, March 11, 2014-10:02 PM

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव कराने में प्रति व्यक्ति खर्च में 20 गुणा की बढ़ोत्तरी हुई है और 1952 के पहले लोकसभा चुनाव में यह 60 पैसे थी जो 2009 के आम चुनाव में बढ़कर 12 रूपए हो गई। चुनावी खर्च को अगर पूर्ण रूप में देखें तो 1952 में सरकार ने जहां दस करोड़ 45 लाख रूपये खर्च किए वहीं 2009 में कुल 846 करोड़ 67 लाख रूपए की राशि खर्च की गई। यह आंकड़ा चुनाव आयोग और कानून मंत्रालय की वेबसाइट पर आधारित है।

लागतवार अगर खर्चे पर गौर करें तो 2004 चुनाव का सरकार के खजाने पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ा था जब पूरी चुनावी प्रक्रिया पर 1114 करोड़ रूपए का खर्च आया था। इस चुनाव में प्रति मतदाता खर्च भी सबसे ज्यादा था क्योंकि सरकार ने प्रति मतदाता 17 रूपए खर्च किए थे। पहले लोकसभा चुनाव में प्रति मतदाता खर्च एक रूपए से भी कम था जो आने वाले चुनावों में तेजी से बढता गया। इस बढ़ोत्तरी के कारणों में उस तथ्य को गिना जा सकता कि चुनावी मैदान में अनेक राजनीतिक दल शामिल हुए और यहां तक कि निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या भी बढ़ी।

2014 के ताजा लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग पहली बार मतदाता जागरूकता अभियान, चुनाव की तिथि से पहले मतदाता पर्ची का वितरण और इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन में नत्थी पर्ची की व्यवस्था करने जा रहा है और इससे चुनावी खर्च और बढ सकता है। लोकसभा चुनाव पर आने वाला पूरा खर्चा केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है लेकिन कानून व्यवस्था को बनाये रखने पर आने वाला खर्च संबंधित राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You