ऐसी संस्था नहीं है नरमी की हकदार

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Tuesday, March 11, 2014-11:16 PM
नई दिल्ली(मनीषा खत्री):अपने काम में लापरवाही बरतते हुए बच्चों के लिए जहरीला व घटिया भोजन सप्लाई करने वाली संस्था को कोई राहत नहीं दी जा सकती है। यह टिप्पणी करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस संस्था को राहत देने से इंकार कर दिया है,जिसके द्वारा तैयार मिड-डे मिल में तीन बार छिपकली मिलने की वजह से उसका ठेका रद्द कर दिया गया था। 
 
न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ ने रॉयल एजुकेशन एंड सोशल वेल्फेयर सोसायटी की तरफ से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में सरकार के उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी,जिसके तहत सोसायटी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था। 
 
खंडपीठ ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। उन्हें अच्छा व पोषणयुक्त खाना दिया जाना सरकार की जिम्मेदारी है। इसीलिए सरकार ने मिड-डे मिल की योजना शुरू की थी। इसका ठेका सरकार ने कई संस्थाओं को दिया था। ऐसे में अगर कोई संस्था अपने काम में लापरवाही बरतती है तो उसके प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती है।
 
 खंडपीठ ने कहा कि एक बार किसी भोजन में छिपकली मिलना लापरवाही या इत्तेफाक हो सकता है, मगर बार-बार उसी संस्था के द्वारा तैयार मिड-डे मिल में छिपकली का मिलना, यह दर्शाता है कि वे किस कदर लापरवाह हैं। 
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