नफरत वाले भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाये : कोर्ट

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Wednesday, March 12, 2014-9:52 PM

 नई दिल्ली :  धर्म, जाति, क्षेत्र या जातीयता के आधार पर सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के नफरत पैदा करने वाले भाषणों को समाज के लिये हानिकारक बताते हुये उच्चतम न्यायालय ने कानून लागू करने वाली एजेन्सियों को ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

 न्यायमूर्ति बी एस चौहान की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने विधि आयोग से इस पहलू की जांच करने का आग्रह किया कि नफरत पैदा करने वाले भाषणों में किसी राजनीतिक दल या उसके सदस्यों के लिप्त होने पर ऐसे दल की मान्यता खत्म की जा सकती है। न्यायालय ने विभिन्न संगठनों के नेताओं को भड़काने वाले भाषण देने से रोकने के लिये दिशा निर्देश बनाने से इंकार करते हुये कहा कि इस समस्या से निबटने के लिये कानून में पर्याप्त प्रावधान हैं।


 न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘समस्या की जड़ कानून का अभाव नहीं बल्कि इस पर प्रभावी तरीके से अमल की कमी है। कार्यपालिका और सिविल सोसायटी को पहले से ही उपलब्ध कानूनी प्रावधानों पर कारगर अमल में अपनी भूमिका निभानी होगी।’’  न्यायाधीशों ने कहा कि सभी स्तरों पर नफरत पैदा करने वाले भाषणों पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत है। इस तरह के भाषण लिखने वालों के खिलाफ मौजूदा दंडनीय कानूनों के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है और कानून लागू करने वाली सभी एजेन्सियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मौजूदा कानून निष्प्रभावी नहीं हों।


 न्यायालय ने विधि आयोग से अनुरोध किया कि पेश मामले में उठाये गये मसलों का गहराई से अध्ययन करके इन पर विचार किया जाये और यदि उचित समझे तो नफरत पैदा करने वाले भाषण को परिभाषित करके निर्वाचन आयोग को अधिक मजबूत बनाने के लिये संसद से सिफारिश की जाये ताकि इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके।
 

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