कांग्रेस के वर्चस्व वाली सीट पर हमेशा रही विकास की दरकार

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Wednesday, March 12, 2014-10:23 PM

नई दिल्ली, (राजन शर्मा):  कांग्रेस के नेतृत्व में भारत निर्माण का दावा करने वाली यू.पी.ए.2 की सरकार का दावा कितना सच है।  देश का इतिहास खंगाल कर जाना जा सकता है लेकिन वर्तमान में दिल्ली की नॉर्थ-वेस्ट लोकसभा सीट का इतिहास देखें तो कांग्रेस के वर्चस्व वाली इस सीट को हमेशा से विकास की दरकार रही है।

यहां 1952 से 2014 के बीच होने वाले लोकसभा चुनावों में सबसे ज्यादा कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत दर्ज की लेकिन यहां आज भी बुनियादी सुविधाओं लोगों को नहीं मिली। 16वीं लोकसभा के लिए चुनावों की घोषणा हो चुकी है और आने वाले लोकसभा चुनावों में आप के उभार के बाद मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।


पिछड़ी रही नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली: देहात दिल्ली से अपनी पहचान रखने वाली बाहरी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र का 2008 में नाम बदल कर नॉर्थ-वेस्ट कर दिया गया। नाम बदलने के बाद भी यहां की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। विकास के मामले में नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली हमेशा से पीछे है। क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ पानी की समस्या गंभीर है। 239 गांव और लगभग 100 से ज्यादा अनाधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन, पानी की निकासी और सफाई व्यवस्था की स्थिति चौपट है। बावजूद इसके क्षेत्र के जनप्रतिनिधि बुनियादी सुविधाओं के स्तर में सुधार की बात करते हैं।


बदहाल स्वास्थ्य सेवा: 10 विधानसभाओं में केवल 4 अस्पताल हैं। नॉर्थ-वेस्ट लोकसभा क्षेत्र के अंर्तगत नरेला में सत्यावादी राजा हरिशचंद्र, बवाना में महर्षि वाल्मीकि, मंगोलपुरी में संजय गांधी और रोहिणी अम्बेडकर अस्पताल है। यहां स्वास्थ्य सेवा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र की कुल आबादी लगभग 36,56,539  है, जबकि 4 अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या केवल 1200 है। इन अस्पतालों में चिकित्सा स्टॉफ की कमी के से ज्यादातर विभाग बंद होने की कगार पर हैं।

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