शहादत के 48 घंटे बाद भी घर नहीं पहुंचे शहीदों के शव!

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Thursday, March 13, 2014-12:34 PM

रायपुर: छत्तीसगढ़ की जीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में 16 जवान शहीद हो गए। नक्सली हमले को लेकर राजनीति चर्म पर है। सभी राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रही है। परंतु उन सबके बीच एक ऐसी बात भी सामने आई जो कभी तकलीफ देह थी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रशासन जवानों के शव 48 घंटे बाद भी उनके परिवार तक पहुंचाने में नाकाम रहा।

जानकारी के मुताबिक, बुधवार को दस शहीद रायपुर के माना विमानतल लाए गए। इनमें से पंजाब और कोलकाता के पांच शहीदों को तो वहीं से रवाना कर दिया गया, परंतु सतना, ग्वालियर और अनूपपुर के पांच जवानों के शवों को ट्रेन का इंतजार करना पड़ा। इन जवानों के शवों को मंगलवार की रात वहां से भेजा गया, जो गुरुवार को यहां पहुंचेंगे। इन पांचों शवों को देवेंद्रनगर श्मशान घाट के फ्रीजर में रखा गया था, जहां से इन्हें छत्तीसगढ़, शालीमार और सारनाथ एक्सप्रेस से रवाना किया गया।

रांची और सतना के जवानों के शव गुरुवार को शहादत के पूरे 48 घंटे बाद घर पहुंचेंगे। इतना ही नहीं, सतना के शहीद जवान मनमोहन सिंह के परिवार वालों को तो 36 घंटे बाद तब सूचना दी गई, जब वहां के विधायक ने सीधे एसपी से बात की। वही, नक्सली हमले के विरोध में कांग्रेस ने 14 मार्च को छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया है।

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