...तो इस सुरंग के 2015 तक बनने के आसार नहीं!

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Thursday, March 13, 2014-4:05 PM

मनाली: रोहतांग सुरंग का निर्माण कार्य फरवरी 2015 की समय सीमा को पार कर सकता है। यह सुरंग लद्दाख को देश के शेष हिस्सों से सभी मौसम में जोड़े रखेगा।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसके निर्माण में 500-600 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च भी हो सकता है, लेकिन अभी 1,495 करोड़ रुपए खर्च होने की परिकल्पना की गई है।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यहां सोलांग घाटी में 28 जून, 2010 को रक्षा मंत्रालय की इस सुरंग परियोजना की आधारशिला रखी थी। परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने  मीडिया को बताया, ‘‘विषम जलवायु परिस्थिति और एक के बाद एक नई-नई भौगोलिक चुनौतियों के कारण परियोजना में देरी हो रही है।’’

सुरंग निर्माण में पानी के रिसाव और कमजोर परत का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए इसका निर्माण 2017 तक पूरा हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘अभी तक 830 करोड़  रुपए खर्च हो गए हैं। परियोजना में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो सकते हैं।’’

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष रवि ठाकुर ने निर्माण कार्य का जायजा सात मार्च को लिया था। उन्होंने मीडिया से कहा कि निर्माण कार्य धीमे-धीमे चल रहा है। उन्होंने इस बारे में रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी को विलंब की जानकारी दी है। परियोजना का निर्माण रक्षा मंत्रालय का संगठन सीमा सड़क संगठन एक अन्य कंपनी स्ट्राबाग-एफकोंस के साथ मिलकर कर रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक विपरीत मौसम, शीत ऋतु में भारी बर्फबारी जैसे कारणों की वजह से इसके निर्माण में देरी हो रही है। सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति ने सितंबर 2009 में परियोजना को मंजूरी दी थी। सुरंग निर्माण के बाद लाहौल घाटी के 20 हजार लोग देश के दूसरे हिस्से से हमेशा जुड़े रहेंगे। ये लोग शीत ऋतु में रोहतांग दर्रे के बंद होने पर अलग-थलग पड़ जाते हैं।
 

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