स्कूलों में जंक फूड ही जंक फूड

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Thursday, March 13, 2014-11:50 PM

नई दिल्ली : सरकार के एक बयान के बाद स्कूलों में जंक  फूड  पूरी तरह बैन हो जाएंगे। हालांकि अभी भले ही कई स्कूल स्वीकार कर रहे हैं कि उनके यहां छात्रों को जंक  फूड खाने की छूट नहीं है लेकिन हकीकत इससे अलग है।

दरअसल, तभी दिल्ली हाईकोर्ट को पिछले साल एक कमेटी बनाकर इसी मसले पर सुझाव मांगा। अब केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा है कि स्कूल तो छोडि़ए उसके 50 मीटर के दायरे में भी जंक  फूड नहीं बिकने चाहिए।

वीरवार को नवोदय टाइम्स ने कुछ स्कूलों के प्रिंसीपलों से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने एक स्वर में दावा कि उनके यहां पहले से जंक फूड खाने की इजाजत नहीं है लेकिन कई स्कूल में पढऩे वाले बच्चों से बात की तो उन्होंने कहा कि उनकी कैंटीन में चिप्स, कोला के अलावा कई फ्राई आइटम भी मिलते हैं।
केंद्रीय विद्यालय जे.एन.यू. कैंपस के प्रिंसीपल एस.एम. गर्ग कहते हैं उनके यहां तो छोटे बच्चों के टिफिन के दौरान टीचर मौजूद होती हैं और सीनियर क्लास के बच्चों के टिफिन की रैंडम चैकिंग की जाती है। माऊंट आबू स्कूल और डिफैंस कालोनी के राधाकृष्णन इंटरनैशनल स्कूल ने कहा कि उनके यहां फ्राई चीजें टिफिन में बच्चे नहीं लाते।


भारत के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एम्स की प्रमुख डाइटीशियन अल्का मोहन कहती हैं, निश्चित तौर पर बच्चों में जंक  फूड का चलन बढ़ा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कम उम्र में बच्चों ने जंक  फूड  से परहेज नहीं किया तो कुछ ही साल बाद उसके परिणाम भुगतने होंगे।

अल्का कहती हैं कि एक दिन में इसे नहीं रोका जा सकता लेकिन इसके लिए स्कूलों और पैरेंट्स को मिलकर काम करना होगा। बच्चों को एजुकेट करना होगा। उन्होंने कहा कि सुगर,   डायबिटीज और मोटापा से छात्रों से जूझने का यह प्रमुख कारण है। मोटापे से विभिन्न परेशानियां शरीर में होने लगती हैं।

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