‘लालू के खिलाफ मामले वापस लेने का फैसला अभियोजक को नहीं बल्कि अदालत को करना चाहिए’

  • ‘लालू के खिलाफ मामले वापस लेने का फैसला अभियोजक को नहीं बल्कि अदालत को करना चाहिए’
You Are HereBihar
Saturday, March 15, 2014-7:51 PM

नई दिल्ली: एक वरिष्ठ कानूनी अधिकारी ने आज सीबीआई को आगाह किया कि अभियोजकों को नहीं बल्कि अदालतों को राजद प्रमुख लालू प्रसाद के खिलाफ मामले वापस लेने का फैसला करना चाहिए। सूत्रों के अनुसार सालीसिटर जनरल मोहन पारासरन ने सीबीआई को यह सलाह दी है। सीबीआई प्रमुख रंजीत सिन्हा ने इस मामले में उनके तथा अभियोजन निदेशक ओ पी वर्मा के बीच मतभेद होने के बाद सालिसीटर जनरल से राय मांगी थी। पारासरन की सीबीआई को भेजी ‘‘संक्षिप्त’’ टिप्पणी काफी महत्व रखती है क्योंकि इसके निदेशक ने पिछले हफ्ते लालू के खिलाफ तीन लंबित मामलों में आरोप हटाने की वकालत की थी। ये मामले में बहुचर्चित चारा घोटालों से जुड़े हैं और इसी घोटाले से जुड़े एक मामले में राजद नेता को सजा सुनाई जा चुकी है।

लालू के खिलाफ आरोप खारिज किए जाने के मामले में सिन्हा का अभियोजन निदेशक तथा सीबीआई पटना जोन के प्रमुख सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद है। सिन्हा ने 26 फरवरी को कहा था, ‘‘मैं शाखा, एचओजे एवं डीओपी (अभियोजन निदेशक) की राय से सहमत नहीं है। चूंकि मैं डीओपी से सहमत नहीं हूं,  तीनों नियमित मामलों की याचिकाओं में उल्लेखित डीओपी की टिप्पणियों से उठे कानूनी मुद्दों पर सालीसिटर जनरल की राय लेने के लिए इसे उनके पास संंदर्भित कर दिया जाना चाहिए। ’’
 

यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!

Recommended For You