बेटे की मौत पर मांगा 5 करोड़ मुआवजा

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Sunday, March 16, 2014-12:25 AM

नई दिल्ली (मनीषा खत्री): अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एम.टेक. की पढ़ाई कर रहे एक युवक की काबिलियत को देखते हुए  विश्वविद्यालय ने उसे एक प्रोजैक्ट का इंचार्ज बनाकर ओखला स्थित सीवेज ट्रीटमैंट प्लांट में रिसर्च करने भेजा था, परंतु न तो विश्वविद्यालय को इस बात का अंदाजा था और न ही इस युवक को कि यह प्रोजेक्ट उसकी जिंदगी का आखिरी प्रोजैक्ट साबित होगा।


अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह युवक ट्रीटमैंट टैंक में गिर गया और उसकी मौत हो गई। साल भर पहले हुई इस घटना में पुलिस ने मामला दर्ज करके  अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। अब इसी सब से आहत होकर इस युवक के पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही कहा है कि उसे दिल्ली जल बोर्ड से 5 करोड़ रुपए मुआवजा दिलाया जाए।


 न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने अलीगढ़ निवासी इस व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार, दिल्ली जल बोर्ड के वाइस चेयरमैन, ओखला सीवेज ट्रीटमैंट प्लांट के चीफ इंजीनियर और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले की सुनवाई 15 मई को होगी।


अलीगढ़ निवासी सुशील कुमार गुप्ता ने अधिवक्ता सुनील कुमार झा के जरिए दायर याचिका में बताया है कि उसका 23 साल का बेटा दीपक गुप्ता अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जेड.एच. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी से एनवायरमैंटल इंजीनियरिंग में एम.टेक. कर रहा था। 3 अप्रैल 2013 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने उसे एक रिसर्च प्रोजैक्ट का इंजीनियर इंचार्ज बनाकर दिल्ली के ओखला सीवेज ट्रीटमैंट प्लांट में भेजा। उसके साथ विश्वविद्यालय का एक अन्य छात्र मंसूर हुसैन भी था।

दोनों इस प्लांट के रिएक्टर से निकलने वाली नाइट्रोजन गैस पर रिसर्च कर रहे थे। चार अप्रैल 2013 को दोनों युवक सीवेज ट्रीटमैंट प्लांट के खतरनाक टैंक के पास गैस के कुछ सैंपल लेने के लिए गए थे। वहां के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते दोनों छात्रों को बिना सुरक्षा उपायों के ही ट्रीटमैंट प्लांट में जाने की अनुमति दी गई।

यही लापरवाही घातक सिद्ध हुई और दीपक ट्रीटमैंट प्लांट के टैंक में गिर गया। वहां पर आपदा स्थिति में बचाव में प्रयोग किए जाने वाले उपकरण भी नहीं थे। जिसके चलते दीपक को समय पर निकाला नहीं गया और उसकी मौत हो गई। इस  संबंध में सरिता विहार थाने में गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया परंतु एक साल बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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