होली के दौरान आपातकाली स्थिती से निपटने के लिए खास इंतजाम

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Sunday, March 16, 2014-9:51 PM

नई दिल्ली :  होली के दिन दिल्ली वालों को किसी भी आपात स्थिति से बचाने के लिए राजधानी के अस्पतालों ने कमर कस ली है। होली खेलने के दौरान होने वाले लड़ाई झगड़ो से सैकड़ो लोग घायल हो जाते है। इसके अलावा हानिकारक रसायनों के दुष्प्रभाव से कई तरह की परेशानियों में लोग पड़ जाते हैं।

इसी को देखते हुए हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी राजधानी के अस्पतालों के आपात विभाग में पूरी तैयारी की गई है। सफदरजंग अस्पताल में खास इंतजाम किए गए हैं। गत वर्ष अकेले सफदरजंग अस्पताल में होली में आपसी झड़पों एवं रासायनिक रंगों के दुष्प्रभाव की वजह से घायल हुए 200 से ज्यादा मरीजों को भर्ती कराया गया था। सफदरजंग अस्पताल के प्रवक्ता एसवाई मकवाना ने बताया कि अस्पतालों के पास उपलब्ध आंकड़ें भी बताते हैं कि होली में घायल होने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है।

पिछले 10 सालों में होली के दौरान सफदरजंग अस्पताल में 700 लोग होली में हुए खतरनाक मुढभेड़ के चलते भर्ती हुए हैं। इनमें दो महिलाओं की मौत भी हो चुकी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स)के डर्मिटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ वीके शर्मा ने बताया कि होली में खतरनाक रसायनों से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं।

होली के मद्देनजर डर्मिटोलॉजी एवं वरिनोलॉजी विभाग को पूरी तरह से सुविधाओं से लैस कर तैयार किया गया है ताकि पीड़ित मरीजों के रसायनों के दुष्प्रभाव से त्वचा को होने वाली नुकसान को ठीक किया जा सके। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा यहां दूर-दराज से रासायनिक दुष्प्रभाव से त्वचा को हुए गंभीर नुकसान के लिए मरीज रेफर किए जाते हैं। होली में हर साल की तरह इस बार भी अस्पताल हर आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

 मैक्स अस्पताल के वरिष्ठ डर्मिटोलॉजिस्ट डॉ गौरांग कृष्णा ने बताया कि  कुछ रंगों में तांबा, सीसा, चांदी, अल्यूमिनियम एवं आयोडीन भी मिला होता है। रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से सबसे पहले बाल एवं त्वचा प्रभावित होती है। इसके अलावा रसायन न सिर्फ बालों को ब्लीच करते हैं, बल्कि वे इसे काफी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर देते हैं। कुछ रंगों में डाइज, इंजन ऑयल एवं पाउडर्ड गैस भी मौजूद होती है। बालों को नष्ट करने के अलावा ये सिर की त्वचा को भी क्षतिग्रस्त कर देते हैं।

आरएमएल अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक गत वर्ष होली में रासायनिक रंगों के दुष्प्रभाव से पीड़ित 40 मरीज भर्ती किए गए थे। इस बार भी अस्पताल सामान्य मरीजों को  अटैंड करने के लिए तैयार है। इसी तरह एलएनजेपी अस्पताल भी सामान्य रुप से प्रभावित मरीजों का प्राथमिक इलाज के लिए पूरी तरह से तैयार है।

 

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