कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर मतदाता तक पहुंचता है चुनाव आयोग

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Tuesday, March 18, 2014-11:59 AM

नई दिल्ली: चुनाव आयोग को मतदाताओं को मतदान के लिए जागरूक करने के लिए जितनी कवायद करनी पड़ती है, उससे कहीं अधिक मेहनत मतदाताओं तक पहुंचने के लिए दुर्गम पहाडों, घने जंगलों, उफनती नदियों, गहरी घाटियों, तपते रेगिस्तान, बर्फ से ढकी वादियों और ऊबड़ खाबड़ रास्तों को पार करने में करनी पड़ती है लेकिन कोई भी चुनौती या बाधा उसे अपने काम को अंजाम देने से नहीं रोक पाई है और वह हमेशा दूर-दराज के इलाकों के मतदाताओं तक पहुंचने में कामयाब रहा है।

आयोग की इस कठिन मेहनत को देखते हुए मतदाताओं के लिए जरूरी हो जाता है कि वे अनिवार्य रूप से मतदान में शामिल हों। आयोग के कर्मचारी मतदाताओं तक पहुंचने के लिए कितनी कष्टसाध्य यात्राएं करते हैं। यह बात इससे समझी जा सकती है कि 2009 के आम चुनाव में सड़क ठीक नहीं होने के कारण असम के सोनितपुर जिले में चुनाव सामग्री पहुंचाने के लिए दो बैलगाडियों की भी व्यवस्था की गई थी और राज्य के कई हिस्सों में चुनाव अधिकारियों और सामग्रियों को ले जाने के लिए पालतू हाथियों का इस्तेमाल किया गया था।

अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में मतदाताओं तक पहुंचना हमेशा दुष्कर रहा है। यहां कई स्थानों पर पहुंचने के लिए चुनाव अधिकारियों को नावों से 35 से 40 घंटे तक सफर करना पड़ा है। 2009 के आम चुनाव में लक्षद्वीप में 105 मतदान केन्द्र तो ऐसे थे जहां नावों से ही पहुंचा जा सका था। इसी तरह मिनिकॉय द्वीप इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें हेलीकॉप्टरों से पहुंचाई गई।

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