केजरीवाल सरकार ने की थी घोषणा,नहीं किया बजट में प्रावधान

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Tuesday, March 18, 2014-9:54 PM

नई दिल्ली : बिजली का बिल न चुकाने वाले उन डिफाल्टरों को कोई राहत नहीं मिलने वाली है, जिनको केजरीवाल सरकार ने बिजली बिल में पचास प्रतिशत की राहत दी थी। चूंकि इस संबंध में केजरीवाल सरकार ने निर्णय लेकर घोषणा तो कर दी परंतु बजट में कोई प्रावधान नहीं किया। यह बात खुद दिल्ली सरकार की तरफ से दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष बताई गई है।

सरकार ने न्यायालय के समक्ष बताया है कि  केजरीवाल सरकार ने बिजली बिल माफी का निर्णय व घोषणा तो की मगर इसके जरूरी बजटीय प्रावधान नहीं किया। ऐसे में अब यह संभव नहीं है कि दिल्ली सरकार बिजली बिल डिफाल्टरों को कोई राहत दे सके। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बी.डी.अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष सरकार की तरफ से दायर हलफनामे में यह सब बातें बताई गई हैं। अब इस मामले में 22 मई को सुनवाई होगी।

दिल्ली सरकार के विद्युत विभाग के उप सचिव मधु सूदन की ओर से एक हलफनामा दायर करते हुए सरकार की वकील जुबेदा बेगम ने बताया कि केजरीवाल सरकार ने 31 जनवरी 2014 को अक्तूबर 2012 से मई 2013 के बीच बिजली का बिल जमा न कराने वाले बिजली डिफाल्टरों का 50 फीसद बिजली का बिल माफ किए जाने की घोषणा की थी।

मगर, सरकार ने इस योजना को लागू करने संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं की। दरअसल केजरीवाल सरकार ने घोषणा को पूरा करने के लिए बजट में जरूरीराशि का प्रावधान ही नहीं किया, जिससे बिजली के बिल माफ किए जा सकें। बिजली बिल माफी के लिए उचित फंड न होने के कारण दिल्ली सरकार केजरीवाल सरकार की कैबिनेट द्वारा लिए गए बिल माफी के निर्णय को लागू नहीं कर सकती है।

विवेक नारायण शर्मा नामक व्यक्ति ने न्यायालय में दायर याचिका में कहा है कि अक्तूबर 2012 में आप पार्टी ने बिजली की बढ़ी कीमतों के खिलाफ एक आंदोलन चलाया था,जो दिसम्बर 2013 तक जारी रहा था। इसके तहत लोगों से बिजली का बिल न देने का आग्रह किया गया था। इस दौरान 24 हजार 36 लोगों ने अपने बिल नहीं दिए और वह डिफाल्टर हो गए।

इसी दौरान 2508 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। अब 12 फरवरी को सरकार ने इन लोगों के पचास प्रतिशत बिल माफ कर दिए हैं और जो मामले दर्ज हुए हैं,उनको वापिस लेने की बात कही है। ऐसे में सरकार का यह फैसला असंवैधानिक है क्योंकि यह फैसला राष्ट्रहित में नही है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी। इस फैसले से अन्य राज्यों के लोगों पर भी गलत प्रभाव पड़ेगा और लोग बिल भरना बंद कर देंगे। इसलिए इस फैसले को रद्द किया जाए।

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