आजमगढ़ के रास्ते प्रतीक की सियासी जमीन तैयार कर रहे हैं मुलायम

  • आजमगढ़ के रास्ते प्रतीक की सियासी जमीन तैयार कर रहे हैं मुलायम
You Are HereUttar Pradesh
Wednesday, March 19, 2014-10:10 AM

लखनऊ: अपने जुझारू तेवरों के लिए चिरपरिचित समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ से अपनी उम्मीदवारी घोषित कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को चुनौती और पूर्वांचल में पार्टी का वर्चस्व कायम रखने के साथ ही अपने पुत्र प्रतीक यादव की सियासी जमीन तैयार करने की कवायद शुरू की है।

यादव के राजनीतिक दांवपेंच की जानकारी रखने वालों का यह भी कहना है कि वह सजातीय बिरादरी में कोई दूसरा नाम बढने नहीं देते। इस क्रम में जानकारों का कहना है कि माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पूर्व महासचिव रामसुमेर यादव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पूर्व महासचिव मित्रसेन यादव और पश्चिमी क्षेत्र के डी.पी.यादव का नाम इस सिलसिले में खासतौर पर लिया जा सकता है।

मित्रसेन यादव इस बार सपा से फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी एवं विधायक हैं। वह इससे पहले तीन बार सांसद और पांच बार विधायक रह चुके हैं लेकिन 1989 में भाकपा से सांसद चुने जाने के बाद जिस तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बननी शुरू हुई थी उसे सपा अध्यक्ष ने 1991 में उन्हें पार्टी में शामिल कर उस पर ब्रेक लगा दी।

आजमगढ़ से सांसद रमाकान्त यादव का अपनी बिरादरी में खासा प्रभाव है। वह तीन बार सांसद चुने जा चुके हैं। सपा अध्यक्ष की आजमगढ से उम्मीदवारी को रमाकान्त यादव के बढते दबदबे को कम करने की कोशिश के रप में भी देखा जा रहा है हालांकि जानकारों का दावा हैं कि यादव अन्य कारणों के साथ ही अपने छोटे पुत्र प्रतीक यादव की सियासी जमीन को तैयार करने को अधिक महत्व दे रहे हैं।

इसके पीछे उनका तर्क है कि इसी तरह यादव ने 1999 में सम्भल और कन्नौज दो सीटों से चुनाव लडा था। बाद में उन्होंने कन्नौज सीट छोड़ दी थी और उपचुनाव के जरिये अपने बडे पुत्र अखिलेश यादव को सक्रिय राजनीति में प्रवेश दिलाया था। माना जा रहा है कि यादव एक बार फिर उसे दोहराने जा रहे हैं। कयास लगाया जा रहा है कि यदि दोनों सीटों पर वह जीतते हैं तो एक सीट से इस्तीफा देकर उपचुनाव के जरिये अपने छोटे पुत्र प्रतीक यादव को लोकसभा का उपचुनाव लड़ाकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश दिला सकते हैं।
 
गौरतलब है कि गत वर्ष अक्टूबर में सपा ने पंचायती राज मंत्री बलराम यादव को आजमगढ से प्रत्याशी बनाया था। उसके बाद वहां के कुछ कार्यकर्ताओं ने सपा के प्रदेश कार्यालय पर आकर उनकी उम्मीदवारी का विरोध किया था और प्रतीक यादव को प्रत्याशी बनाये जाने की मांग करते हुए नारेबाजी की थी।
 

यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!

Recommended For You