सिक्कों पर माता वैष्णो देवी, कोर्ट का सरकार को नोटिस

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Thursday, March 20, 2014-3:09 PM

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार और रिजर्व बैंक से जवाब मांगा है। हिंदू देवी देवताओं और मंदिरों के चिह्न वाले सिक्के जारी करने को लेकर आई एक जनहित याचिका पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि सरकार को किसी धर्म का प्रचार करते नहीं दिखना चाहिए और धर्मनिरपेक्षता शब्द का अर्थ सही संदर्भ में लिया जाना चाहिए।

याचिका में कहा गया था कि इस तरह की चीजों से सरकार की सेकुलर छवि बिगड़ती है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बी डी अहमद की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि सरकार को किसी धर्म का प्रचार नहीं करना चाहिए चाहे वह हिंदू हो, इस्लाम हो या फिर ईसाई हो। पीठ ने वित्त मंत्रालय व रिजर्व बैंक को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में उस नीति की स्थिति रिपोर्ट देने को कहा है, जिसके तहत मंदिर व देवी देवताओं के चिह्न सिक्कों पर बनाए गए हैं।

अदालत ने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 23 अप्रैल तय की है। अदालत दिल्ली निवासी नफीस काजी तथा अबू सैयद द्वारा अधिवक्ता ए राशीद कुरैशी के माध्यम से दायर जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। याचिका में रिजर्व बैंक को 2010 और 2013 में धार्मिक चिन्ह् के साथ जारी सिक्कों को वापस लेने का निर्देश देने की अपील की गई है।

जनहित याचिका में कहा गया है कि केंद्र को एक राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश दिया जाना चाहिए जिसके तहत किसी भी धर्म के चिह्न को सरकार की मूर्त या अमूर्त संपत्ति बनाने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि ये चिह्न धर्मनिरपेक्ष छवि को आघात पहुंचाते हैं।

सरकार ने 2010 में बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर के 1000 साल पूरे होने के मौके पर इस मंदिर की छवि वाला 5 रुपये का सिक्का जारी किया था। इसी तरह 2013 में रिजर्व बैंक ने 5 रुपये का एक और सिक्का जारी किया था, जिस पर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तस्वीर छपी थी।

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