वकील की नियुक्ति सरकारी जिम्मेदारी

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Friday, March 21, 2014-11:46 AM

नई दिल्ली : दिल्ली की जिला अदालतों में सरकारी वकीलों के पड़े खाली पदों को न भरने पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों से कहा है कि  इस संबंध में जल्द कार्रवाई की जाए।


न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने इस मामले में कई निर्देश जारी करते हुए दिल्ली सरकार के गृह विभाग व सी.बी.आई. को निर्देश दिया है कि 4 सप्ताह के अंदर रिपेार्ट पेश करें। अदालत ने कहा कि सरकारी वकीलों की कमी से आपराधिक मामलों की सुनवाई में देरी हो रही है। अदालत ने कहा कि यह अचंभे की बात है कि कई सरकारी वकीलों को तो दो-दो कोर्ट के मामलों की जिम्मेदारी सौंप रखी है। ऐसे में असिस्टेंट पब्लिक प्रोसिक्यूटर व एडीशनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर की पदों पर नई भर्ती न करके सरकार लापरवाह है।


सुप्रीम कोर्ट द्वारा नेताओं के मामलों को एक साल में निपटाने के संबंध में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि कैसे कोई आपराधिक कोर्ट सरकारी वकील की अनुपस्थिति में काम कर सकती है। अदालत ने कहा कि यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि हर कोर्ट में एक योग्य सरकारी वकील नियुक्त किया जाए। सबसे गंभीर मामला ये ह ेकि इस मामले में बार-बार न्यायालय को निर्देश देने पड़ रहे हैं। साथ ही इस बात पर भी गंभीरता जताई है कि दिल्ली सरकार व सी.बी.आई की तरफ से पेश होने वाले वकीलों को उनकी फीस देने में देरी की जा रही है।


हालांकि सरकार के वकील ने आश्वासन दिया कि अब किसी वकील को अपनी फीस के बिल क्लीयर करवाने में मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। जिसके बाद अदालत ने कहा कि अगर अब भी इस मामले में देरी की गई तो प्रिसींपल सैक्रेटरी पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही सी.बी.आई के निदेशक(प्रोसिक्यूटर) को भी नोटिस जारी  कर कहा है कि वह सी.बी.आई. की तरफ से पेश होने वाले वकीलों की फीस का तुरंत भुगतान करें। साथ ही इन वकीलों की फीस बढ़ाने पर भी विचार किया जाए।

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