लहर से नहीं चलेगा काम, मोदी को बनना होगा तूफान

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Sunday, March 23, 2014-12:54 PM

नई दिल्ली: केन्द्र में सरकार बनाने हेतु भाजपानीत राजग को ‘मिशन 272’ की प्राप्ति के लिए प्रधानमंत्री पद के पार्टी प्रत्याशी नरेंद्र मोदी मोदी को तूफान का रूप लेना होगा, केवल लहर के सहारे इस लक्ष्य को पाना मुश्किल होगा। आगामी लोकसभा चुनावों में मोदी अपनी पार्टी के लिए अपने बलबूते पर 272 सीटों से अधिक कितने वोट दिलवा पाएंगे, यह जानना जरूरी है। अभी तक जितने भी ओपिनियन पोल सामने आए हैं उनमें भाजपा के ‘मिशन 272’ की सफलता कभी नहीं दिखाई गई।

एन.डी.टी.वी. द्वारा हाल ही में किए गए ताजा सर्वेक्षण में भाजपा को 195 सीटें दी गईं जिससे यह बात स्पष्ट हुई है कि केन्द्र में अगली गठबंधन सरकार का नेतृत्व भाजपा ही करेगी। गठबंधन घटकों को मिलाकर राजग 232 सीटों का आंकड़ा पार कर पाएगा। इस तरह भाजपा को 272 के आंकड़े को पाने के लिए 2-3 प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों के सहयोग की जरूरत होगी। अगर भाजपा को 50 प्रतिशत सीटें जीतनी हैं तो इसे 18 प्रमुख राज्यों में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन कर कम से कम 5 प्रतिशत से ज्यादा सीटें प्राप्त करनी होंगी।

यानी कि मोदी को अपने बलबूते पर पार्टी के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त सीटें  जितानी होंगी, अकेले या गठबंधन के रूप में। इन 18 बड़े राज्यों में भाजपा ने अकेले ही 9 राज्यों में अच्छा प्रर्दशन किया। बाकी के 9 अन्य राज्यों में इसका गठबंधन के साथ प्रदर्शन अच्छा रहा। जिन 9 राज्यों में भाजपा ने अकेले ही अपने बलबूते पर अच्छा प्रदर्शन किया उनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, दिल्ली, गुजरात, झारखंड और केरल शामिल हैं। जिन राज्यों में भाजपा को गठबंधन कर अधिक सीटें जीतनी हैं उनमें महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, पंजाब और हरियाणा शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा में भाजपा अकेले ही चुनाव लड़ेगी। पार्टी इन राज्यों में अपने बलबूते पर श्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाएगी। भाजपा का अकेले और गठबंधन के साथ जीत का अनुपात 45 प्रतिशत ही रहा। इस जीत दर से पार्टी को कुछ गठबंधनों के साथ 509 सीटों में से 230 सीटें ही मिल पाएंगी इसलिए मोदी को आक्रामक रुख बनाकर तूफान बनकर कम से कम 5 प्रतिशत (45-50) सीटें अतिरिक्त जीतने की जरूरत है।

भजापा ने तमिलनाडु (5 छोटी पार्टियों) और बिहार में लोजपा के साथ गठबंधन किया है। तेलंगाना और सीमांध्र क्षेत्र में यह स्पष्ट नहीं कि तेदेपा के साथ गठबंधन के बावजूद पार्टी का प्रदर्शन कैसे रहेगा। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के मैदान में आने के कारण भाजपा का अकेले में प्रदर्शन अच्छा नहीं रह पाएगा।

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