विश्व जल दिवस: खतरे में गंगा डॉलफिन

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Sunday, March 23, 2014-2:55 PM

नई दिल्ली (अशोक चौधरी):कई मत्स्य प्रजातियों, जलीय जीवों और मांसाहारी कटहवा कछुओं के बाद डालफिन भी खतरे में है। संकटग्रस्त प्रजातियों की फेहरिस्त में शामिल अत्यंत बुद्धिमान, संवदेनशील व अति सामाजिक यह राष्ट्रीय जलीय जीव संरक्षण, संवर्धन के नितांतअभाव और शिकारियों की गिद्ध दृष्टि से लुप्त होने के कगार पर है।

जिसका कारण गंगा नदी में लगातार बढ़ता प्रदूषण है। डालफिन को बचाने के लिए  नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा और वल्र्ड वाइड फंड के सहयोग से 40 से ज्यादा विशेषज्ञों ने चर्चा की। गंगा डालफिन कार्य योजना के कार्यशाला को संबोधित करते हुए पर्यावरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव रंजन मिश्रा ने डालफिन के संरक्षण में तेजी न आने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्रधिकरण का गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए प्राथमिक उद्देश्य है। डब्ल्यू डब्ल्यू एफ के सीईओ ने कहा कि उनकी टीम गंगा डालफिन के चुनौतियों के बारें में जानकारी एकत्रित कर रही  है।


बता दें कि देश में बिजनौर से लेकर बुलन्दशहर तक का 165 किमी. का अकेला ऐसा सबसे बड़ा क्षेत्र है, जहां डाल्फिन की विश्व भर की संख्या का बारहवां हिस्सा पाया जाता है। गंगा एक्शन प्लान में 91 में इस अति दुर्लभ जीव की ओर सरकारी तंत्र का ध्यान गया और गणना शुरू की गयी। गढ़मुक्तेश्वर में पहली बार एक डाल्फिन 90 में देखी गयी।


तब से लेकर अब तक इनकी संख्या में उतार चढ़ाव का दौर बरकरार है। उप्र में भी पहले ही से विलुप्ति की कगार पर पहुंची डाल्फिन भारी संकट में है। गैंगेटिक डालफिन शेडयुल-1 में होने के बावजूद उंगलियों पर गिनने लायक ही रह गई हैं। वल्र्ड वाइड फंड फार नेचर की लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट, डाल्फिन कंजरवेशन सोसायटी, कन्वेंशन आन इंटरनेशनल ट्रेड इन एनडेंजर्ड स्पीसीज आफ वाइल्ड, इंटरनेशनल यूनियन फार कंजरवेशन आफ नेचर की रिपोर्ट आंखें खोलती हैं पर डाल्फिन के लिए हमारी सरकारें कभी चिंतित नजर नहीं आतीं।

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