पूर्वी दिल्ली: होगी कांटे की टक्कर

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Monday, March 24, 2014-12:43 PM

नई दिल्ली : कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट में जहां एक ओर विकास हुआ है तो दूसरी ओर मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है। केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद भी इलाके के कांग्रेसी सांसद पर विकास न कराने के आरोप लगते रहे हैं। विपक्षियों के साथ-साथ जनता का भी मानना है कि यहां जो विकास हुआ है वह राष्ट्रमंडल खेलों की वजह से हुआ है।पूर्र्वी दिल्ली के विकास से लेकर समस्याओं पर नजर डालती सतेंद्र त्रिपाठी, कुमार गजेंद्र, सज्जन चौधरी, निहाल सिंह और मनीष राणा की रिपोर्ट :पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला खासा दिलचस्प होने वाला है।

यहां से लगातार 2 बार के सांसद संदीप दीक्षित के सामने भाजपा के टिकट पर महेश गिरी और आम आदमी पार्टी के टिकट पर महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी मैदान में हैं। बहुजन समाज पार्टी की ओर से मुस्लिम कार्ड खेलते हुए पुराने कांग्रेसी शकील सैफी को टिकट दिया गया है। ऐसे में देखना यह होगा कि क्या जनता इस बार कांग्रेस के विकास को वोट देती है या बदलाव के नाम पर भाजपा को या दिल्ली की राजनीति में उभर कर सामने आई आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को। गौरतलब है विधानसभा चुनावों के नतीजों में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी। जिनमें यहां से आम आदमी पार्टी को 5 भाजपा को 3 और कांग्रसे को महज 2 सीटों से संतोष करना पड़ा था। 

राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हुए विकास के नाम पर संदीप दीक्षित लोगों से वोट मांग रहे हैं। तो भाजपा इसी दौरान हुए भ्रष्टाचार के नाम पर कांग्रेस के खिलाफ वोट मांग रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों को मौसेरा भाई बताते हुए आम आदमी पार्टी इस बार बदलाव के रूप में नई पार्टी को वोट देने की मांग कर रही है। पूर्वी दिल्ली सीट जातीय समीकरणों के लिहाज से भी काफी दिलचस्प मानी जा रही है। इस सीट पर पंजाबी, ब्राह्मण, गुर्जर और मुस्लिम वोटर अच्छी खासी तादाद मे हैं।

अभी तक गुर्जर और मुस्लिम वोटरों पर अपना एकछत्र राज समझने वाली कांग्रेस को विधान सभा चुनावों के नतीजों के बाद खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट के लिए विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि कांग्रेस की स्थिति यहां बेहद खराब है। किसी जमाने में कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर कांगे्रस के पास महज 2 विधानसभा सीटें हैं। भाजपा की स्थिति भी कुछ खास अच्छी नहीं हैं, भाजपा के पास कांग्रेस  से बस एक सीट ज्यादा है। भाजपा की टिकट पर बाहरी प्रत्याशी का उतारना भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है।

2009 में थी यह स्थिति

सीट का समीकरण वर्ष 2009 में भाजपा प्रत्याशी और क्रिकेटर चेतन चौहान को करीब पचास फीसदी वोटों से हराकर विजयी हुए पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेट संदीप दीक्षित इस सीट पर सांसद है। कांग्रेस के प्रवक्ता की जिम्मेदारी मिलने बाद टी.वी. पर संदीप दीक्षित अपनी बातों को तथ्यों के साथ रखने के लिए माहिर माने जाते है और अपने तथ्यों पर वह विपक्षी को मात दे देते है लेकिन इस बार के चुनाव में संदीप दीक्षित तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर अपने विरोधियों को परास्त कर पाते है या नहीं यह तो चुनाव नतीजे ही  बताएंगे लेकिन दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार गिरने के बाद पतली हुई कांग्रेस की हालत इस बार संदीप दीक्षित को मुश्किल में डाल सकती है क्योंकि इस सीट के अंतर्गत आने वाली 10 विधानसभा में से पार्टी को 8 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था।

विधानसभा नतीजों की वजह से कांग्रेस की हवा खराब है तो वहीं भाजपा को इस बार तीन गुणी मेहनत करने की जरुरत करनी पड़ेगी लेकिन इस सीट पर समीकरण और आंकड़े तो आम आदमी पार्टी के लिए राहत देने वाले हैं। विधानसभा चुनाव में 10 में से 5 सीटों पर कब्जा करके बैठी आम आदमी पार्टी खुश तो है लेकिन चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। ऊंट के करवट बैठने के लिए इस समय 2 टांगे आम आदमी पार्टी के पाले में है तो वहीं 2 टांगे भाजपा के पाले में है क्योंकि भाजपा का मानना की प्रधानमंत्री के लिए नरेन्द्र मोदी की लहर विधानसभा के आंकड़े धुल जाएंगे।  

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