परंपरा को जिंदा रखने की कवायद में घोड़ा-बग्गी मालिक

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Monday, March 24, 2014-2:07 PM

नई दिल्ली (वसीम सैफी) : दिल्ली की सड़कों से तांगा हटाने के बावजूद दिल्ली में सदियों पुरानी घोड़ा-बग्गी की परंपरा को कुछ लोग आज भी जिंदा रखे हुए हैं। हर वीरवार को दिल्ली में तांगा रखने के शौकीन लोग फिरोजशाह कोटला स्थित दरगाह हजरत ख्वाजा सैय्यदबुद्दीन समर कंदी चिस्ती की दरगाह के पास एकत्र होते हैं, जहां वह अपने घोड़ों और बग्गियों की शो-बाजी करते हैं।बग्गी रखने के शौकीन लोगों ने बताया कि सरकार और प्रशासन की लापरवाही के चलते घोड़ा-बग्गी का खेल अब खत्म हो गया है। वह घोड़ा-बग्गी व्यवसाय के लिए नहीं, बल्कि शौक और पूर्वजों की परंपरा को जिंदा रखने के लिए रखते हैं। 

दिल्ली कसाबपुरा निवासी सुआदिकीन कुरैशी ने बताया कि शहर-ए-आजम दिल्ली में कभी तांगा रसूख की सवारी होती थी। लोग बेहतर नस्ल के घोड़े और खूबसूरत बग्गी रखते थे। बादशाहों के समय में तांगा-बग्गी वाले अक्सर अपने घोड़े की ताकत दिखाने के लिए दौड़ भी लगवाते थे। आजादी के बाद दिल्ली में सरकार ने भी घोड़ा-बग्गी की दौड़ का आयोजन कर इन्हें प्रोत्साहन दिया। विजेता को सरकार 51 हजार रुपए, मेडल और घोड़ा-बग्गी का साजो- सामान देती थी, लेकिन 1977 में आखिरी दौड़ के बाद इस खेल को प्रोत्साहन देना बंद कर दिया  गया। दिल्ली में घोड़ा-बग्गी की रेस पिछले साल प्रधान ब्रह्म प्रकाश ने करवाई थी।

मो. याहिया ने बताया कि दिल्ली की सड़कों पर 4 साल पहले व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होने वाले तांगों को बंद कर दिया गया। निजी रूप से घोड़ा-बग्गी रखने वाले इस श्रेणी में नहीं आते। मगर पुलिस ने उन्हें भी परेशान करना शुरू कर दिया। जब वह वीरवार को फिरोजशाह कोटला दरगाह के पास एकत्र होते हैं, तो पुलिस उन्हें धमकी देकर भगा देती है।

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