हादसे पर भी नहीं जागा अस्पताल

  • हादसे पर भी नहीं जागा अस्पताल
You Are HereNcr
Monday, March 24, 2014-3:08 PM

नई दिल्ली : नजफगढ़ के खेड़ा डाबर कलां स्थित एशिया के सबसे बड़े चौधरी बह्मप्रकाश आर्युवैदिक अस्पताल में लगी भयंकर आग के 12 दिन के बाद भी अस्पताल के भूतल से न तो आग का मलबा हटा और न ही वहां रखे गत्तों को हटाया गया, जिससे अस्पताल में फिर हादसे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। 

नियमों की अनदेखी

स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार  राजधानी में किसी भी अस्पताल के भूतल में न तो ओपीडी लगाई जा सकती है और न ही कोई मलबा एकत्र किया जा सकता है, लेकिन सरकार के ही अधिकतर अस्पतालों में ही इन नियमों की अनदेखी कर भूतल में ओ.पी.डी. चलाई जा रही है। दवाईयों के गत्ते रखे जाते हैं। 

12 मार्च को लगी आग से सबक लेते हुए बाकि के अस्पतालों ने अभी तक अपने भूतलों से न तो ओपीडी बंद की और न ही मलबा हटाया है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ज्ञात हो कि कोलकाता के एक निजी अस्पताल के भूतल में लगी आग से वहां 23 लोगों को अपन जान से हाथ धोना पड़ा था। 

 गौरतलब है कि 12 मार्च को आर्युवेदिक अस्पताल में भयंकर आग लगी थी। जिसे बुझाने के लिए दमकल कर्मचारियों को कई घंटे मशक्कत करनी पड़ी थी। अस्पताल प्रशासन ने आग लगने का कारण अस्पताल के भूतल में जमे मलबे को बताया था। इसमें बड़ी संख्या में गत्ते थे, जिससे आग ने भयंकर रूप लिया था। ओपीडी में मरीजों में मची भगदड़ से कई मरीजों को मामूली चोटें भी लगी थीं। हादसे के बाद भी अस्पताल की नींद नहीं टूटी है।

यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!

Recommended For You