नेताजी पर निर्वाचन आयोग की पैनी नजर

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Tuesday, March 25, 2014-12:20 PM

लखनऊ: चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा और आचार संहिता पर निर्वाचन आयोग की पैनी नजर के कारण लोकसभा चुनाव में
मतदाताओं के दरवाजे पहुंचना राजनीतिक दलों की मजबूरी बन गयी है। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) तथा कांग्रेस समेत अधिसंख्य
राजनीतिक दल इस चुनाव में सोशल मीडिया को आक्रामक प्रचार का मुख्य हथियार बनाने की कोशिश कर रहे हैं मगर आयोग द्वारा इस सबंध में आचार संहिता के उल्लंघन की चेतावनी के बाद प्रत्याशियों की मजबूरी है कि वह घर-घर जाकर अपने लिये समर्थन जुटायें।


आयोग ने हर प्रत्याशी को चुनाव में अधिकतम 70 लाख रूपये खर्च करने की अनुमति दी है और अधिकतर संसदीय क्षेत्र की वृहदता इतनी है कि यह रकम तो बैनर,होर्डिंगस जैसे प्रचार माध्यमों पर खर्च करने के लिये भी नाकाफी है। चुनाव आचार संहिता और प्रत्याशियों के खर्चे पर चुनाव आयोग की कड़ी नजर के चलते मंहगी गाडिय़ों पर चलने के शौकीन इन नेताओं की मजबूरी है कि यह पैदल ही जनसंपर्क  कर आपको लुभाने का प्रयास करें।

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