गरीब बच्चे के इलाज से पीछे हट रही सरकार

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Wednesday, March 26, 2014-1:09 PM

रिक्शा चालक,दिल्ली सरकार,हलफनामा, : एक रिक्शा चालक के बीमार बच्चे का इलाज कराने से दिल्ली सरकार पीछे हट रही है। यही नहीं सरकार ने हलफनामा देकर कहा है कि उसके पास इतना अधिक पैसा भी नहीं है, किसी एक व्यक्ति का पूरा-पूरा इलाज कराया जाए। सरकार को सभी नागरिकों की जरूरतों को देखना पड़ता है और उनमें समानता बनाकर रखनी होती है।


बता दें कि रिक्शा चालक का बेटा एक जैनेटिक डिसार्डर की बीमारी से पीड़ित है। उसके मुफ्त इलाज कराने के मामले में सरकार ने अदालत के समक्ष यह बात रखी है। न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ के समक्ष दायर हलफनामे में सरकार ने कहा है कि बाकी राज्यों की तुलना में दिल्ली सरकार अपने बजट का दस प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करती है।

सरकार ने आरोग्य निधि,आरोग्य कोष,कल्याण समिति और उपराज्यपाल व मुख्यमंत्री राहत कोष बना रखा है, जिसके  तहत सरकार गरीब लोगों के इलाज पर पैसा खर्च करती है। इस बच्चे की बीमारी पर हर महीने 6 से 7 लाख रुपए खर्च होते हैं।

सरकार अपने कोष से 5 लाख रुपए दे चुकी है। परंतु इसकी बीमारी की अभी कोई दवा नहीं बनी है, इसलिए बार-बार इलाज पर पैसा खर्च हो रहा है। ऐसे में सरकार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह सारा पैसा एक ही बच्चे पर खर्च कर दें। सरकार को बाकी नागरिकों की जरूरतों का भी ध्यान रखना होता है। सरकार ने यह भी कहा है कि भारत जैसे विकासशील देश में स्वास्थ्य के अधिकार का यह मतलब नहीं है कि सरकार सबको मुफ्त इलाज उपलब्ध कराएं। अभी सरकार ऐसी स्थिति में नहीं है।


पिछली सुनवाई पर अदालत को बताया गया था कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के वकीलों ने मिलकर इस बच्चे के इलाज के लिए 7.8 लाख रुपए दिए हैं। वहीं अदालत ने सरकार से भी कहा था कि  वह एक बैठक बुलाए, जिसमें यह विचार किया जाए कि क्या गंभीर रूप से बीमार जरूरतमंद लोगों का इलाज करने के लिए कोई पॉलिसी बनाई जा सकती है।

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