अंतर्राष्ट्रीय पहचान है डी.टी.यू.

  • अंतर्राष्ट्रीय पहचान है डी.टी.यू.
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Wednesday, March 26, 2014-1:35 PM

नई दिल्ली :दिल्ली के देहात इलाके को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने का श्रेय दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डी.टी.यू.) को जाता है। बवाना स्थित दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय देश के सबसे पुराने और दिल्ली का पहले इंजीनियरिंग कालेज में शामिल हैं। वर्ष 1941 में केंद्र सरकार ने दिल्ली पॉलिटैक्निक के नाम से इसका निर्माण कराया था लेकिन दिल्ली सरकार को इसकी बागडोर 1963 में सौंपी गई। 1952 से 2009 तक यह इंजीनियरिंग कालेज दिल्ली विश्वविद्याय से संबद्ध रखता था लेकिन वर्ष 2009 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ और इसका नाम बदलकर दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय रख दिया गया। यहां के छात्रों ने बवाना क्षेत्र का नाम न केवल देश भर में मशहूर किया है, बल्कि दुनिया भर की कंपनियां यहां के छात्रों को नौकरी देने के लिए लाइनों में लगी रहती है। 

दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अपने यहां होने वाले विभिन्न प्रकारों के अनुसंधान के लिए जितनी मशहूर है, उतनी ही अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा नौकरी की एवज में यहां के छात्रों को दिए जाने वाले पैकेज भी मशहूर हैं। वर्तमान में यहां देश के हर राज्य से छात्र पढऩे के लिए आते हैं और एडमिशन के लिए ऑल इंडिया रैंक के के ऊपर निर्भर रहना पड़ता है। छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसके नए कैम्पस की शुरूआत भी की गई है। साथ ही छात्रों को प्रदान की जाने वाली बेहतर शिक्षा का स्तर बनाए रखने के लिए भी विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है जिससे इसकी ख्याति दुनिया भर में ऐसे ही बनी रहे।

 देहात दिल्ली क्षेत्र में प्रर्याप्त मात्रा में भूमि होने के चलते सरकार ने विकास के नाम पर 4 औद्योगिक क्षेत्र तो बसा दिए लेकिन सरकारी अधिकारियों की लापरवाही पर इस कदर औद्योगिक क्षेत्र आए लेकिन विकास गायब हावी हुई कि औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद देहात का यह इलाका विकास से महरूम रह गया। क्षेत्र में वर्तमान समय में भी ज्यादात्तर लोग कृर्षि पर ही निर्भर है लेकिन लोगों को यहां औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए डी.एस.आई.आई.डी.सी. द्वारा कृर्षि की जमीन को ले लिया गया। जिसके बाद भी यहां विकास की कमी बनी हुई है। औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी के कारण से व्यापारी वर्ग ने यहां से मुंह मोडऩा शुरू कर दिया है।

सुध न लेने से सब चौपट

दिल्ली राज्य औद्योगिक और ढाचागत विकास निगम लिमिटेड (डी.एस.आई.आई.डी.सी.) द्वारा नरेला, बवाना, मुढंका और मंगोलपुरी में देहात क्षेत्र में विकास के इरादे से औद्योगिक क्षेत्र बसाए, ताकि देहात के इलाके में लोगों को रोजगार मिल सके और बाहरी क्षेत्र से आने वाले व्यापारियों को जगह ज्यादा होने के कारण से यहां व्यापार के अवसर भी बढ़ सके लेकिन औद्योगिक क्षेत्र बसाए जाने के बाद से डी.एस.आई.आई.डी.सी. के अधिकारियों द्वारा इनकी सुध न लेने से यहां बुनियादी सुविधाओं के नाम पर न तो पानी निकासी की सुविधा दी गई है और न ही पेयजल के लिए कोई व्यापक इंतजाम किए गए है। वहीं औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद कानून व्यवस्था बहुत ही लचर रही। जिस कारण से वर्तमान में चारों औद्योगिक क्षेत्र के व्यापारियों की बाट जोह रहे हैं। 

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