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नही होगी मुजफ्फरनगर दंगों की CBI जांच

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Wednesday, March 26, 2014-1:50 PM

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सितम्बर 2013 में हुए दंगों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने का अनुरोध खारिज कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि केंद्र और राज्य की खुफिया एजेंसियों ने समय रहते इस बारे में पता लगा लिया होता तो
 दंगों को रोका जा सकता था। दंगों की जांच सीबीआई या एसआईटी से कराने की याचिका खारिज करते हुए न्यायालय ने हालात से निपटने के लिए राज्य पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों पर भी नाराजगी जताई।

न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार लोगों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को रोकने में विफल रही, जबकि लोगों के अधिकारों की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। दंगे के केवल मुसलमान पीड़ितों को ही राहत एवं सहायता मुहैया कराने के राज्य सरकार के एक परिपत्र के संबंध में न्यायालय ने निर्देश देते हुए कहा कि राहत एवं सहायता पीड़ितों के धार्मिक उपनाम के आधार पर नहीं, बल्कि सभी वास्तविक दंगा पीड़ितों को उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

राज्य सरकार के उस परिपत्र का उल्लेख करते हुए जिसमें कहा गया था कि राहत केवल पीड़ित मुसलमानों को मिलेगी न्यायालय ने अपने
तमाम निर्देशों में एक का जिक्र किया और कहा कि राहत पीड़ित के धर्म के आधार पर नहीं होनी चाहिए और यह दंगे में वास्तविक पीड़ितों
को मिलनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को यह भी निर्देश दिया कि जब तक इन दंगों का ट्रायल पूरा नहीं हो जाता है पीड़ित परिवारों को पुलिस संरक्षण मुहैया कराये।

दंगों में आरोपी सभी लोगों को उनके राजनीतिक जुडाव को दरकिनार करते हुए गिरफ्तार किया जाये। राज्य सरकार ने दंगों की सीबीआई जांच कराने की अपील का विरोध करते हुए न्यायालय को बताया कि उसने दंगों को रोकने के लिए हरसंभव कदम उठाये। राज्य सरकार ने न्यायालय को यह भी बताया कि उसने दंगों में मारे गए 65 लोगों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि को बढ़ाकर तीन लाख रुपए किया है। राज्य सरकार ने खंडपीठ को सूचित किया कि दंगों में मारे गए परिवारों को अब 15 लाख रुपए दिए जायेंगे। इस राशि में से 13 लाख रुपए राज्य सरकार और दो लाख रुपए केन्द्र की तरफ से दिए जायेंगे।

इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद उन्हें सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं रह गया है।

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