वाराणसी और वड़ोदरा: यहां अर्जुन, भीम, नायक, खलनायक सब एक

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Thursday, March 27, 2014-12:34 AM

नई दिल्ली: यह एक ऐसा कुरुक्षेत्र है जहां अर्जुन भी मोदी हैं और भीम भी वही हैं। उन्हें नायक की संज्ञा दी जा रही है तो खलनायक की भी? इस बार का चुनावी संग्राम हमें महाभारत के ‘कुरुक्षेत्र’ की याद दिलाता है। इसमें अपने विरुद्ध खड़े प्रतिद्वंद्वियों का समूचा विनाश करने वाले अर्जुन भी मोदी हैं तो ‘महाभारत’ के मुख्य खलनायक दुर्योधन की जांघ उखाडऩे वाले भीम की भूमिका भी मोदी ही निभा रहे हैं।

भाजपा भले ही जीत जाए लेकिन नरेंद्र मोदी कहीं से भी न जीत पाएं, ऐसी विरोधियों की दिली इच्छा नजर आती है। इस रणनीति की स्क्रिप्ट भी पहले ही लिखी जा चुकी है जिसके रचयिता हैं कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी और ‘आप’ के अरविंद केजरीवाल। यही कारण है कि मोदी के वाराणसी से चुनाव लडऩे पर अभी तक न समाजवादी पार्टी ने और न ही कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी खड़ा किया है। दोनों दलों का यही दिली गठजोड़ है जिससे साफ पता चलता है कि चुनावी महाभारत में ‘शकुनि चौपड़’ का यह पहला पासा है जबकि दूसरा गुजरात के वड़ोदरा में चलाया गया है। विरोधी दल वाराणसी के रणक्षेत्र को महाभारत के ‘कुरुक्षेत्र’ की नजर से ही देख रहे हैं इसलिए अपना प्रत्याशी खड़ा करके वे केजरीवाल को न तो कमजोर होने देना चाहते हैं और न ही मोदी की जीत का मार्ग प्रशस्त करना चाहते हैं।

अब इस ‘चौपड़’ की दूसरी चाल पर नजर डालते हैं जो कि गुजरात की वड़ोदरा लोकसभा सीट पर चलाई गई है। पहले इस सीट से कांग्रेस के नरेंद्र रावत को पार्टी ने टिकट दिया था, वह पीछे हटे और बाद में ‘कांग्रेस परिवार’ के विश्वस्त मधुसूदन मिस्त्री को मोदी के खिलाफ उतारा गया। मधुसूदन मिस्त्री राहुल के भरोसेमंद लोगों में हैं। 13-14वीं लोकसभा के सदस्य रह चुके मिस्त्री गुजरात की साबरकांठा सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। श्रमिक नेता के रूप में उनकी अच्छी पहचान है। मजे की बात यह है कि वह आर.एस.एस. के सदस्य भी रहे हैं लेकिन कभी भाजपा में शामिल नहीं हुए। यहां वह मोदी के सामने ‘अभिमन्यु’ बनेंगे। यह देखना मजेदार रहेगा।    

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