चुनावी शिगूफा निकला ट्रामा सैंटर

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Friday, March 28, 2014-2:20 PM

नई दिल्ली (राजन शर्मा ): दिल्ली का तीसरा और बाहरी दिल्ली का पहला ट्रामा सैंटर बनने का सपना केवल चुनावी वादा साबित हो रहा। लंबा समय बीत जाने के बाद भी ट्रामा सैंटर बनाने की कवायद बेशक शुरू नहीं हो पाई है, लेकिन नेता इसका गुणगान करना नहीं भूल रहे। एक दशक पहले बनाई गई परियोजना वादों की भेंट चढ़ रही है और इस दिशा में काम भी शुरू नहीं हो पाया है।

जिससे जनता अब नेताओं के इस वादे को भूलने लगी है। वहीं, चुनाव विधानसभा का हो या लोकसभा का नेता जी क्षेत्र में आकर जनता को वादा भूलने नहीं देते, क्योंकि इसी जनता से तो इन वादों को वोट बैंक में तब्दील करना है।

चुनाव दर चुनाव बीत गए पर अमल में नहीं योजना

एक दशक पहले चुनाव के चलते क्षेत्र की जनता से तत्कालीन प्रत्याशी ने वादा कर दिया ट्रामा सैंटर बनाने का, इसके लिए अस्पताल का चयन भी कर दिया गया, लेकिन 2 चुनाव बीत जाने के बाद भी परियोजना का ड्राफ्ट नहीं बना। स्वास्थ्य विभाग भी इसे नकार रहा है। वहीं, परियोजना के बारे में अस्पताल के प्रशासन की मानें, तो ट्रामा सैंटर बनने की परियोजना के बारे में खुद उन्हें जानकारी नहीं है, बाकि जनता को सब पता है।

गोल्डन ऑवर में सुविधा देने का था प्रयास

तत्कालीन सांसद और विधायक ने मिलकर क्षेत्र के लोगों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए ट्रामा सैंटर बनाने की परियोजना तैयार की थी, जिससे यहां हादसे में शिकार हुए लोगों को एम्स ट्रामा सैंटर या फिर सुश्रुत ट्रामा सैंटर न भेजा जाए और गोल्डन ऑवर में घायल लोगों को यहीं पर ट्रामा सैंटर की सुविधा उपलब्ध हो जाए, जिससे घायल लोगों की जान बचाई जा सके।

20 लाख आबादी

ट्रामा सैंटर के वादे से नेता जी ने 20 लाख लोगों तक अपनी बात पहुंचा दी थी, क्योंकि अगर यह ट्रामा सैंटर बन जाता तो इसका फायदा सीधे तौर पर 20 लाख लोगों को होना था, लेकिन अब जब ट्रामा सैंटर निर्माण की परियोजना धरातल पर नहीं आ पाई, तो इसका जवाब क्या नेता दे पाएंगे। वहीं, जनता के सामने एक बार फिर मौका है कि वे चुनावी परियोजना के भरोसे न रहकर वोट करें। जनता निश्चित तौर पर इस बार वोट से अपना जवाब देगी।

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