-दिल्ली की गद्दी बीच में छोडऩा भारी पर सकता है ‘आप’ पर

  • -दिल्ली की गद्दी बीच में छोडऩा भारी पर सकता है ‘आप’ पर
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Friday, March 28, 2014-10:18 PM

नई दिल्ली, (अजीत के.सिंह) दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट पर पिछले दिनों तक मजबूत स्थिति में दिख रही आम आदमी पार्टी (आप) के प्रत्याशी कर्नल देवेंद्र सेहरावत की स्थिति अब बिगडऩे लगी है। ‘आप’ सरकार द्वारा दिल्ली के सत्ता बीच में छोड़ कर जाना और केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों को दिए गए तोहफे आप के प्रत्याशी कर्नल देवेंद्र शेहरावत का खेल बिगाड़ सकते हैं। 

 दरअसल दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट में कई ऐसे इलाके आते हैं, जिनमें सरकारी नौकरी करने लोग काफी संख्या में रहते हैं और ये मतदाता केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदमों की वजह से कांग्रेस पार्टी से खुश नजर आ रहे हैं। दिल्ली के पालम विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले राज नगर में रहने वाले सुमीत बनर्जी कहते हैं ‘आम आदमी पार्टी से काफी उम्मीदें थीं लेकिन जिस तरीके से अरविंद केजरीवाल ने अपनी सरकार गिराई उसे देखकर लगता है कि उनका उद्देश्य केवल प्रधानमंत्री बनना है, इससे ज्यादा नहीं।

केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियेां के लिए काफी काम किया है। डीए तो हर साल बढ़ता है लेकिन सातवां वेतन आयोग बैठाकर सरकार ने साफ कर दिया है कि वह महंगाई को तो काबू में नहीं कर पाई लेकिन इसकी भरपाई करने की कोशिश जरूर कर रही है।’ नवोदय टाइम्स की टीम ने दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट के अंदर आने वाले इलाकों के कुल 48 लोगों से बात की, इनमें 15 सरकारी कमर्चारी थे।

इनमें 10 सरकारी कर्मचारी कांग्रेस के पक्ष में दिखे। लोगों से बातचीत के दौरान लोगों ने आप के प्रति अपनी काफी नाराजगी जताई। 48 लोगों से 27 लोग ऐसे थे जो कि ‘आप’ द्वारा दिल्ली की गद्दी छोडऩे से खफा दिखे। इनका साफ कहना था कि अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री का पद हासिल करने के लिए दिल्ली की सरकार गिराई। दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट के तहत 7 विधानसभा सीटें आती हैं, पिछले विधान सभा चुनाव में इनमें पांच भाजपा और दो आप के पास गई थीं। अभी जो स्थिति है उसमें आप की जमीन पूरी तरह से खिसकती नजर आ रही है।

हालांकि भाजपा की स्थिति अभी भी यहां कांग्रेस से अच्छी बताई जा रही है। 48 लोगों में 21 लोग भाजपा के पक्ष में दिखें, वहीं 16 लोग ऐसे थे जो कि कांग्रेस के कामकाज से खुश थे। आप के पक्ष में सिर्फ 8 लोग थे। तीन लोग ऐसे थे, जिन्होंने कोई भी राय जाहिर नहीं की। हालांकि इन लोगों में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं था जो कि यह बताने के लिए तैयार हो कि वह मतदान किसे करने वाला है। 

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