केजरीवाल से क्यों डर रहे हैं मोदी?

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Saturday, March 29, 2014-12:11 PM

जालंधर (वीरेन्द्र): पिछले कुछ दिनों से भाजपा के पी.एम. उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी द्वारा राहुल गांधी से भी अधिक ‘आप’ के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर हमले किए जा रहे हैं। गत दिवस तो मोदी ने केजरीवाल को ए.के. 49 की संज्ञा देते हुए पाकिस्तान का एजैंट तक कह डाला। मोदी के इस आक्रामक रुख को लेकर राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चा है कि क्या मोदी केजरीवाल को लेकर घबराहट में हैं?

कहा जा रहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद भाजपा डरी हुई है कि डा. हर्षवर्धन का खेल बिगाडऩे वाले केजरीवाल कहीं मोदी का खेल भी न बिगाड़ दें। नरेन्द्र मोदी को इस बात का आभास हो चुका है कि भ्रष्टाचार और महंगाई के नाम पर कांग्रेस का जितना वोट कटना था कट चुका, अब कांग्रेस को और डैमेज नहीं किया जा सकता। मोदी जानते हैं कि अब लड़ाई कांग्रेस विरोधी वोट बटोरने की ही है। महंगाई तथा भ्रष्टाचार के कारण जो मतदाता कांग्रेस से नाराज हैं उन्हीं के सहारे मोदी पी.एम. की कुर्सी तक पहुंचना चाहते हैं।

मोदी को इस बात का भी आभास है कि उनकी पार्टी के बंगारू लक्ष्मण तथा येद्दियुरप्पा जैसे कई नेताओं पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं तथा उनके नए सहयोगी राम विलास पासवान पर भी भ्रष्ट होने के आरोप लगते रहे हैं। मोदी को इसी बात का डर है कि इन हालात में महंगाई से दुखी तथा भ्रष्टाचार विरोधी मतदाता भाजपा की झोली में आने की बजाय ‘आप’ की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं।

कई प्रमुख समाचार पत्रों ने अपने कालमों में लिखना भी शुरू कर दिया है कि केजरीवाल फैक्टर के चलते भाजपा 180-185 तक सिमट सकती है। मोदी जिस प्रकार केजरीवाल को अहमियत दे रहे हैं उससे इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि केजरीवाल कुछ ही महीनों में राष्ट्रीय स्तर के नेता बन गए हैं तथा इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि 2014 के लोकसभा चुनाव में केजरीवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

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