परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी अहम: हाईकोर्ट

  • परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी अहम: हाईकोर्ट
You Are HereNational
Sunday, March 30, 2014-11:47 AM
नई दिल्ली: हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए एक आरोपी को राहत देने से इंकार करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि अगर किसी मामले में स्पष्ट साक्ष्य उपलब्ध ना हो उस मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य अहम भूमिका निभाते हैं। 
 
न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर व न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता की खंडपीठ ने आरोपी विनोद कुमार उर्फ चवन्नी की अपील को खारिज करते हुए कहा कि उसे निचली अदालत द्वारा दी गई सजा एकदम सही है। निचली अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा दी थी।
 
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विनोद के खिलाफ अभियोजन अपना आरोप साबित करने में पूरी तरह से कामयाब रहा है। इस मामले में पुलिस ने परिस्थितिजन्य सुबूतों के आधार पर यह साबित किया है कि विनोद ने ही तरसेम सिंह की हत्या की थी। इस मामले में एक कांस्टेबल अशोक कुमार चश्मदीद गवाह था। इसी गवाह ने आरोपी को हत्या के बाद उसे फरार होते देखा था और उसे पकडऩे की कोशिश भी की थी। उसकी गवाही को अदालत नकार नहीं सकती है। 
 
पुलिस के अनुसार कांस्टेबल अशोक कुमार 14 फरवरी, 2005 मंगोलपुरी के एफ ब्लाक में गश्त कर रहा था कि उसे बचाओ-बचाओ का शोर सुनाई दिया। जब वह मस्जिद के पास पहुंचा तो उसने देखा कि तरसेम सिंह घायल पड़ा है और उसके पास से चाकू लेकर विनोद भाग
रहा है। 
 
अशोक ने विनोद को पकडऩे का प्रयास भी किया, मगर सफल नहीं हुआ। अशोक ने सिंह को संजय गांधी मैमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर 16 फरवरी को उसकी मौत हो गई। निचली अदालत ने इस मामले में विनोद को 16 जनवरी, 2008 को उम्रकैद की सजा दी थी। 
यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!

Recommended For You