डर-डर के जी रहे मिट्टी के बर्तन बनाने वाले

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Sunday, March 30, 2014-12:29 PM
नई दिल्ली, 29 मार्च (ब्यूरो): सरकार खादी उद्योग को तो बढ़ावा देती है लेकिन मिट्टी के बर्तन बनाने व बेचने वालों को प्रोत्साहन देने के लिए कुछ नहीं करती। ऊपर से आधुनिक ीकरण ने इस कारोबार की कमर तोड़ दी है। 
 
गांधी नगर महिला कालोनी में मिट्टी के बर्तन बेचने वाली महिलाएं इसी का शिकार हैं। ऊपर से उन्हें दिन-रात एम.सी.डी. का डर सताता रहता है कयोंकि एम.सी.डी. का दस्ता अचानक से आता है और मिट्टी के बर्तन तोड़कर चला जाता है। वहीं, एम.सी.डी. के अधिकारी कार्यवाई को फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने की बात कहते हैं।
 
गांधी नगर में कई महिलाएं हैं जो 2-4 साल नहीं बल्कि 30 साल से अधिक समय से फुटपाथ पर मिट्टी के बर्तन बेचकर परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाती हैं लेकिन जब से स्टील व नॉन-स्टीक बर्तन का चलन चला, लोगों ने मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करना बंद कर दिया। वाटर कूलर व फ्रीज ने मटके का गला ही घोट दिया, जबकि जो स्वाद मटके के पानी में है, वो फ्रीज या वाटर कूलर में कहा। यही वजह है कि मटके का पानी पीने के शौकीन लोग यहां मटका लेने के लिए आ जाते हैं।
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