राजनीतिक पार्टियों का सोशल मीडिया पर धावा

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Monday, March 31, 2014-11:04 AM

नई दिल्ली (विशेष): आगामी लोकसभा चुनावों के दौरान प्रत्येक प्रमुख राजनीतिक पार्टी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रही है। मगर उनकी रणनीतियां अभी तक पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाईं। यह बात शैली चोपड़ा ने हाल ही में अपनी नई पुस्तक ‘द बिग कनैक्ट’ में कही है।

आम चुनावों के लिए मतदान शुरू होने में अब कुछ ही समय रह गया है। अब हर राजनीतिक पार्टी सोशल नैटवर्किंग साइटों पर चर्चाएं कर रही है। औसतन भारतीय सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रही हैं। ऐसा दिखाई देता है कि यह नेता अपने घृणा प्रचार, राजनीतिक दृढ़शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं, मगर यह निश्चित नहीं कि क्या राजनेता इस ऊर्जा को मतों में बदलने में कामयाब होंगे। यद्यपि राजनीतिक पार्टियां युवा मतदाताओं के साथ बातचीत कर उनकी शक्ति से फायदा उठाने का काम कर रही हैं। मगर अभी उन्हें इस संबंध में काफी कुछ सीखना है। चोपड़ा ने कहा कि भारत में राजनेताओं द्वारा बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल किए जाने से यह आज काफी लोकप्रिय है। राजनेता चाहते हैं कि लोग ऑनलाइन पर आएं और अपनी राय उन्हें दें।

चोपड़ा ने आगे कहा कि भारतीय लोग मसालेदार और स्कैंडल भरी खबरों को अधिक पसंद करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि मुख्य मीडिया नकारात्मक और स्कैंडल की खबरें छापते हैं जबकि सोशल मीडिया जायकेदार विषयवस्तु की तलाश में रहता है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी या राहुल गांधी के बारे में जब लोग बातचीत करते हैं तो उनके बीच कोई आधार नहीं होता। पंगु फतवे में हर वोट की गणना की जाती है और मतदाता किसी राजनेता के पास आसानी से पहुंच नहीं पाते। इंटरनैट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया के अभियान से उन 24 राज्यों में मतदान 3 से 4 प्रतिशत इधर-उधर हो सकता है जहां इंटरनैट का इस्तेमाल करने वाले काफी संख्या में होते हैं।

राजनीतिक पार्टियों और उनके गैर रस्मी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर बाढ़ ला दी है। ये लोग ऑनलाइन पर अपनी मौजूदगी दर्ज करवाकर आगे कुछ और नहीं करते जबकि राजनेता सोशल मीडिया पर डटकर अपनी बात कहते रहते हैं। वे अभी तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले ही बने हुए हैं, उनके ‘ड्राइवर’ नहीं बन पाए। ट्विटर पर परस्पर विरोधी राय छाई रहती है जोकि फेसबुक जैसी सेवाओं पर चर्चा के रूप में अपर्याप्त रहती है। चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर चर्चा करने वाली 3 राजनीतिक पार्टियों को 1-1 अध्याय दिया। ये पार्टियां हैं भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी। जिस तरह इन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया है उससे स्पष्ट होता है कि वास्तविक जीवन में अपनी गतिविधियों का प्रतिबिम्ब दिखाया है। कांग्रेस पार्टी सोशल मीडिया पर देर से पहुंची।

यद्यपि तिरुवनंतपुरम से उसके सांसद शशि थरूर ने काफी समय पहले ही ट्विटर पर इसका इस्तेमाल किया था। कम अवधि में उनके कई अन्य सहयोगियों ने भी इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। कुछ ने तो दिसम्बर में इसका इस्तेमाल किया। हाईकमान की तरफ से उनके लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं कि उन्हें क्या कदम उठाना चाहिए। कांग्रेस के मामले में नेता खुद को सफल होने में काफी मुश्किल महसूस कर रहे हैं क्योंकि पार्टी के 2 नेता ऑनलाइन पर नहीं आए हैं। चोपड़ा ने कहा कि इस स्थिति में ऑनलाइन पर कांग्रेस का चेहरा कौन है? सोशल मीडिया पर कांग्रेस का बचाव करने या उनके विचारों का प्रचार कौन करेगा, कांग्रेस पार्टी में कई नेता ऑनलाइन पर आते हैं, मगर उनकी कोई एक रणनीति नहीं।

आप ने अपने निजी नेताओं के व्यक्तित्व से अपनी छवि को उभारा है। पिछले वर्ष दिल्ली के चुनावों में आप की सफलता का मुख्य कारण ऑनलाइन पर मौजूदगी थी। चोपड़ा ने कहा कि मोदी की देश भर में लहर है जो युवा मतदाताओं को अपनी ओर आकॢषत कर रही है। इससे स्पष्ट होता है कि यह मोदी की ही लहर है। जरूरी नहीं कि भाजपा की हो। उन्होंने कहा कि वह बहुत से लोगों से मिलीं जिन्होंने स्पष्ट किया कि वे मोदी को वोट दे रहे हैं। अगर नरेन्द्र मोदी वहां नहीं होते तो यह जरूरी नहीं कि वे भाजपा को वोट दें।

जहां तक भाजपा का संबंध है मोदी अपनी समानांतर मशीनरी का इस्तेमाल कर रहे हैं जो लोग मोदी का प्रचार कर रहे हैं वे दूसरी पार्टियों के मुकाबले प्रौद्योगिकी में काफी आगे हैं। पार्टी ने मोदी के प्रचार के लिए काफी प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ तैनात कर रखे हैं। भाजपा के आई.टी. सैल के सदस्य विनीत गोनयका ने बताया कि पार्टी ने लोगों से जुड़े रहने के लिए विभिन्न रणनीतियां बनाई हैं। हम यू-ट्यूब, फेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल कर पार्टी को मतदाताओं से जोड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने वर्करों, स्वयंसेवकों तथा कार्यकत्र्ताओं को आपस में जोडऩे के लिए वल्र्डसैब और इंटरनैट का इस्तेमाल करते हैं।

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