गुजरात सरकार ने वेबसाइट से हटाए आर्थिक आंकड़े

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Monday, March 31, 2014-3:53 PM

नई दिल्ली: गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने चुनावों के मद्देनजर अपनी वेबसाइट से आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों को हटा लिया है। अगले महीने से शुरू होने वाले आम चुनाव को लेकर विभिन्न सर्वेक्षणों में भाजपा को आगे बताया जा रहा है। प्रांत में आर्थिक मामलों संबंधी निर्देशालय ने बजट संबंधी जानकारी, जनगणना और आर्थिक वृद्धि दर संबंधी आंकड़ों तक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया है। 

विभाग के निर्देशक आर.एन. पांडया का कहना है कि इस जानकारी को वेबसाइट पर बरकरार रखने से चुनाव आयोग की आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता था। हालांकि ये आंकड़े सर्च इंजन के जरिए ढूंढे जा सकते हैं जिनका इस्तेमाल मोदी के विरोधी गुजरात में विकास संबंधी दावों की हवा निकालने के लिए कर सकते हैं। 
 
चुनावों पर नजर रखने वाले दिल्ली स्थित संगठन एसोसिएशन ऑफ डैमोक्रेटिक रिफॉम्र्स के संस्थापक जगदीप ने कहा, 'गुजरात पहला ऐसा प्रांत है जिसने चुनाव प्रचार के समय अपनी वेबसाइट पर आर्थिक आंकड़ों संबंधी जानकारी तक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया है। मैंने किसी अन्य प्रांत के बारे में नहीं सुना जिसने ऐसा किया है। जगदीप ने कहा कि अन्य प्रांत इतने संवेदनशील भी नहीं हैं क्योंकि वहां प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं है। आर्थिक वृद्धि दर के मामले में गुजरात पिछले 12 वित्त वर्षों में से 11 में बाकी देश से आगे रहा है। 
 
इस बीच गुजरात में मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिता ने कहा कि चुनाव आचार संहिता का उद्देश्य सरकार के संसाधनों का इस्तेमाल कर अपने विरोधियों पर अनुचित बढ़त हासिल करने से रोकना है। आचार संहिता मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों को वित्तीय अनुदानों, नई सड़कें बनाने और पानी की सप्लाई के लिए काम शुरू करने या इस बारे वादे करने से रोकती है। अनिता ने यह भी कहा कि हम किसी विभाग से यह नहीं पूछते कि उन्होंने अपनी वेबसाइट से क्या हटाया है और क्या नहीं हटाया। उन्होंने इस बारे में स्पष्ट टिप्पणी नहीं की कि क्या राज्य सरकार के लिए वेबसाइट से आर्थिक आंकड़े हटाने जरूरी हैं? अनिता ने कहा कि अगर हमें कोई शिकायत मिलती है तो हम इसकी जांच करते हैं।    
 
चुनाव आयोग की आचार संहिता ने सरकारी निकायों में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है जिनमें केंद्रीय बैंक भी शामिल हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इस महीने के शुरू में आयोग से पूछा था कि चुनाव प्रचार के दौरान नए बैंकों के लिए परमिट जारी किए जा सकते हैं या नहीं।
 

 

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