उतराधिकारी से सी.एम तक वीरभद्र सिंह का राजनीतिक सफर

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Tuesday, April 01, 2014-2:19 PM

 

शिमला: 23 जून 1934 को बुशैहर रियायत के राजा पदम सिंह के घर में जन्में वीरभद्र सिंह ने 13 वर्ष की आयु में बुशैहर रियासत की राजगद्दी सभाली तथा रियासत के 123 वें उतराधिकारी बने। बुशैहर रियायत शिमला हिल स्टेट की सबसे बड़ी रियासत थी। 1901 की जनगणना के अनुसार इस रियायत की आबादी 80572 थी। बुशैहर रियायत को 3 तहसीलों चीनी, रामपुर तथा रोहडू में विभाजीत किया था। चीनी तहसील में किन्नौंर का अधिकतर इलाका आता था तथा इसमें श्याखर, शूआ, राजग्राह,भाभा तथा टुक्क परगना शामिल थे। इसी तरह रामुपर तहसील के अंतर्गत सतलुज नदी में पडऩे वाला क्षेत्र आता था, जिसमें बाघी, मस्तगढ़, रैक, कन्छीन, दसाऊ , 18-20 तथा 15-20 परगने थे। इसके साथ ही रोहडू तहसील में नावर, मंडलगढ़, भम्वूराई, राजगढ़, सुरखली, वाथली तथा डोडराक्वार सहित अन्य परगने शामिल थे।

वीरभद्र सिंह के नाम हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री बनने का रिकार्ड है। उन्होंने 1961 में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की और महासू ससंदीय क्षेत्र से तीसरी लोकसभा के लिए कांग्रेस टिकट पर 49011 मतों से चुनावों में जीत हासिल की। वर्ष 1976 में उन्होंने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का संयुक्त राष्ट की आम सभा में नेतृत्व किया। वर्ष 1976 से 77 तक वह केंद्रीय पयर्टन एवं नागरिक उडड्यन मंत्रालय में उप मंत्री रहे। वर्ष 1982 व 83 के बीच वह केंद्रीय उद्योग राज्य मंत्री रहे। इसके बाद वह 8 अप्रैल 1983 को पहली बार हिमाचल के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह  यू.पी.ए. सरकार में 28 मई 2009 को केंद्रीय इस्पात तथा सूक्ष्म लघू एवं उद्योग मंत्री भी रहे।

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