बंदरों का आतंक भी एक मुद्दा

  • बंदरों का आतंक भी एक मुद्दा
You Are HereNcr
Tuesday, April 01, 2014-3:38 PM

नई दिल्ली (कार्तिकेय हरबोला): लोकसभा के लिए चुनावी तैयारी के बीच पश्चिमी दिल्ली में बंदरों का उत्पात जारी है। निगम में सत्तासीन भाजपा नेता के इलाके में पार्टी प्रत्याशी के लिए समर्थन मांगने पहुंचते हैं तो जनता बंदरों की शिकायत करती है। नरेला ग्रामीण क्षेत्र सहित मामुरपुर, सिंघू, सिंघोला, अलीपुर, बवाना ,कुतुबगढ़, कराला ,गौतम कालोनी व आसपास के क्षेत्रों में सबसे ज्यादा समस्या है।

चुनावी माहौल में इसे गंभीरता से लेते हुए नगर निगम उपराज्यपाल तक को पत्र लिख चुका है व उनसे समस्या के समाधान में मदद मांगी है।

गौरतलब है कि बंदरों का उत्पात दिल्ली खासकर ग्रामीण इलाकों से सटे क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा है। लोग इस समस्या को लेकर नगर निगम के नियंत्रण कक्ष से संपर्क करते हैं। निगम का कहना है कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम के अनुसार बंदरों से निपटने के लिए वह जिम्मेदार नहीं है। यह जिम्मेदारी मूल रूप से दिल्ली सरकार के वन्य जीव विभाग की है।

इसलिए बंदरों को पकडऩे का कार्य भी इसी विभाग का है। वन एवं वन्य जीव विभाग द्वारा कार्रवाई न करने पर जनता की परेशानी को देखते हुए वह सहानुभूति वश बंदरों को पकडऩे का काम कराते हैं। निगम के पास कोई कर्मी नहीं हैं, अनुबंध पर कर्मियों की नियुक्ति कर पकडऩे का काम किया जा रहा है।

चुनावकर्मी परेशान

चुनाव में लगे कर्मचारियों को भी बंदरों के आतंक का सामना करना पड़ रहा है। बंदर कभी किसी कर्मचारी को दौड़ाते हैं तो कभी किसी वीआईपी कार के ऊपर चढ़कर लगी लालबत्ती को तोड़ रहे हैं।

कुछ दिन पहले ही कार के ऊपर चढ़े बंदर को भगाने के लिए एक कर्मचारी गया तो बंदर ने उसे दौड़ाकर काट लिया। इस बारे में नगर निगम को पत्र लिखा, लेकिन  सहयोग नहीं मिला।

विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You