त्रिमूर्ति के हाथ में भाजपा की बागडोर

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Wednesday, April 02, 2014-12:25 AM

नई दिल्ली: महाभारत ग्रंथ में कहा गया है-भविष्य के निर्माण हेतु पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी के लिए रास्ता प्रशस्त करती है, इसी तरह की विचारधारा के साथ संघ परिवार राजनीति का संचालन कर रहा है और इसके साथ ही एक नई त्रिमूर्ति 21वीं शताब्दी के अवतार के रूप में सामने आई है। अटल बिहारी वाजपेयी, एल.के. अडवानी, मुरली मनोहर जोशी की शुरू में भाजपा का मार्गदर्शन करने के लिए ‘त्रिमूर्ति’ बनी थी मगर अब जो भाजपा का संचालन कर रही ‘त्रिमूर्ति’ है उसमें प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टी प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और आर.एस. एस. प्रमुख मोहन भागवत शामिल हैं। केन्द्र में भाजपा सत्ता प्राप्त करे इस बात को यकीनी बनाने के लिए सांझा मकसद ही मौजूदा त्रिमूर्ति को एकजुट किए हुए है। बेशक उनकी भूमिका अलग-अलग है।

मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका यह है कि वह अपनी रैलियों में भारी संख्या में लोगों को एकत्रित करने में कामयाब हो रहे हैं। इसी बात को लेकर राजनाथ सिंह ने एक इंटरव्यू में स्वीकार करते हुए कहा था कि गुजरात के मुख्यमंत्री की लोकप्रियता की उपेक्षा नहीं की जा सकती। वह ही प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त पार्टी प्रत्याशी हैं। मोदी ने अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ काम किया। वह लोगों से सीधे जुड़े हैं। पार्टी महसूस करती है कि बहुत से प्रत्याशी मोदी के नाम से जीतेंगे। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मोदी का विश्वास है कि कुछ करके दिखाओ या पद छोड़ो। वह 7 रेसकोर्स रोड पर पहुंचने से पहले नहीं रुकेंगे। राजनाथ भी पार्टी का अच्छी तरह संचालन करने में पीछे नहीं रहे। उनकी भूमिका दिन-ब-दिन पार्टी में पैदा हो रहे संकट से निपटने की है। वह पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को मनाने के साथ सार्वजनिक आलोचना को खारिज करते हैं। वह असंतुष्टों से भी प्रभावी ढंग से निपटे हैं।

हाल ही में वह गुजरात के वरिष्ठ भाजपा नेता हारेन पाठक से मिले जिन्हें अहमदाबाद पूर्व से टिकट नहीं दिया गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस सफल समीकरण का दूसरा पहलू यह है कि चुनाव प्रक्रिया में आर.एस.एस. पदाधिकारियों की संलिप्तता बढ़ रही है। आर.एस.एस. प्रमुख भागवत काफी सक्रिय हैं जिन्होंने पिछले एक वर्ष में कम से कम 3 बार मोदी का खुलकर समर्थन किया है। इससे पहले संघ ने भाजपा और मोदी का कभी इतना समर्थन नहीं किया जितना कि आज कर रहा है। इससे पहले स्थिति यह थी कि नितिन गडकरी को भाजपा प्रमुख पद से हटाए जाने के बाद कई महीने तक भागवत और मोदी एक-दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करते थे मगर आर.एस.एस. के वरिष्ठ नेता सुरेश भैया जी जोशी ने संघ के मुखपत्र ‘पंचजन्य’ में कहा कि चुनौती बहुत बड़ी है और हम अग्रणी हैं। हम लोगों से बदलाव के लिए वोट मांग रहे हैं और बेहतर सरकार का आधार बना रहे हैं।

नरेन्द्र मोदी: गुजरात के 4 बार के मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा प्रत्याशी हैं। मोदी विकास समर्थक नेता के रूप में उभरे हैं। लोकसभा चुनावों में भाजपा का समूचा अभियान मोदी के स्वप्न को बेचने पर केन्द्रित है। वह वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं और उनके प्रभाव का उत्तर प्रदेश तथा बिहार की 60 सीटों पर निर्णायक  असर पडऩे की संभावना है। पिछले कुछ महीनों से वह देश भर में सार्वजनिक रैलियों को सम्बोधित कर रहे हैं। वह हर रैली में यू.पी.ए. सरकार की गलत नीतियों का पर्दाफाश कर रहे हैं। गुजरात के 2000 दंगों को लेकर मोदी देश के उदारवादी नेताओं के बीच अछूत समझे जाते थे, अब वह स्वीकार्य नेता के रूप में उभर रहे हैं।

मोहन भागवत: वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख हैं जो भाजपा के वैचारिक प्रणेता हैं। भागवत ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी बनाने और लोकसभा चुनावों में 272+ सीटें जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। उन्होंने संघ के पदाधिकारियों की चुनाव प्रचार की ड्यूटियां लगाई हैं। भागवत ने भाजपा को एक संगठित पार्टी के रूप में प्रदर्शित करने में मदद की है। एक लम्बे अर्से के बाद वह राजनीति में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

राजनाथ सिंह: गाजियाबाद के सांसद भाजपा के प्रधान के रूप में अपनी दूसरी पारी खेल रहे हैं। हाल ही में वह पार्टी के लिए प्रमुख रणनीतिकार और संकटमोचक बनकर उभरे हैं। राजनाथ प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी को प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी बनाने के सबसे कट्टर समर्थक के रूप में आगे आए। संघ परिवार के साथ उनके संबंध युवावस्था से थे। वह एक छात्र के रूप में आर.एस.एस. के कार्यकत्र्ता बने। 21 वर्ष की आयु में वह मिर्जापुर (यू.पी.) के लिए आर.एस.एस. के महासचिव बने।

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