राजीव के हत्यारों को नहीं होगी फांसी

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Wednesday, April 02, 2014-1:17 AM

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका की खारिज
नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को फांसी न मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उच्चतम न्यायालय ने फांसी के फंदे से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अपने उस फैसले को आज सही ठहराया जिसमें दया याचिकाओं के निपटारे में विलम्ब को मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने का पर्याप्त आधार बताया गया था।

सुनवाई के बाद विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि न्यायमूर्ति सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्र सरकार की पुनरीक्षण याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि याचिका में फैसले की समीक्षा करने के लिए दी गई दलीलों में कोई दम नहीं है।

1 मार्च को केंद्र ने दायर की थी याचिका
केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में गत 1 मार्च को पुनरीक्षण याचिका दायर करके उससे आग्रह किया था कि वह अपने गत 21 जनवरी के उस फैसले की समीक्षा करे जिसमें उसने दया याचिकाओं के निपटारे में देरी को फांसी की सजा कम करने का व्यापक आधार माना है।

केंद्र ने दी थी ये दलीलें
केंद्र की दलील थी कि इस तरह के मामलों में फैसला देना 2 सदस्यीय खंडपीठ के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। सरकार ने यह भी दलील दी थी कि गत 21 जनवरी के न्यायालय के  फैसले से 15 कुख्यात अपराधियों की फांसी की सजा आजीवन कारावास में तो बदल ही गई साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों के भी फांसी के फंदे से बच निकलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। पुनरीक्षण याचिका में यह भी दलील दी गई थी कि शीर्ष अदालत के इसे फैसले से संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीने का मौलिक अधिकार अब परोक्ष रूप से अपराधियों का भी अधिकार बन गया है।

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