खोई साख को पाना नहीं होगा आसान

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Wednesday, April 02, 2014-1:58 PM

नई दिल्ली (अमित कसाना) : भाजपा नेताओं की मानें तो लोकसभा चुनावों में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के पक्ष में माहौल है। बावजूद इसके दिल्ली देहात के इलाके वाली नॉर्थ-वेस्ट लोकसभा सीट पर भाजपा के लिए अपनी खोई साख पाना आसान काम नहीं होगा।

यहां उसे जीत के लिए काफी मेहनत की जरूरत है। कभी बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट के नाम से मशहूर यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन 2008 में परिसीमन के बाद नॉर्थ-वेस्ट सीट में तब्दील होने के बाद इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा। अब यह सीट उसकी सबसे कमजोर सीटों में शामिल हो चुकी है। 

भाजपा की इस स्थिति का कारण है देहात क्षेत्र में उसके पास साहिब सिंह वर्मा और किशन लाल शर्मा जैसे किसी नेता का न होना, जिससे इस सीट पर भाजपा की स्थिति खराब हो गई और सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व हो गया। 

जब जीत में थी खास बात 

देहात नेता के रूप में मशहूर साहिब सिंह वर्मा और किशनलाल शर्मा की जीत पर नजर डालें, तो दोनों ही नेताओं की जीत में क्षेत्र की 50 प्रतिशत से ज्यादा जनता का समर्थन इन नेताओं के साथ था, जिससे पार्टी ने यहां बड़े अंतर के साथ दूसरे दलों के प्रत्याशियों को मात दी थी। वर्ष 1999 में सहिब सिंह वर्मा ने यहां से चुनाव लड़ते हुए 55.12 प्रतिशत मत प्रतिशत के साथ जीत दर्ज की थी।

जबकि वर्ष 1996 व 1998 में किशनलाल शर्मा के पक्ष में 50.5 और 52.5 प्रतिशत जनता ने वोट किया था। वहीं, इसके बाद स्थिति बदली और 2004 व 2009 में यह घटकर 35.12 और 40.66 रह गया।

कई बार की थी जीत दर्ज

परिसीमन के बाद कई सीटों का इतिहास ही बदल गया। इन्हीं सीटों में राजधानी का बाहरी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र भी शामिल था। इसको चुनाव आयोग ने नॉर्थ-वेस्ट सीट में बदल दिया और इसका हिस्सा काटकर पश्चिमी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली में मिला दिया, जिसके बाद हुए चुनावों में भाजपा को इस सीट पर शिकस्त का सामना करना पड़ा।

जबकि इससे पहले इस सीट पर भाजपा के साहिब सिंह वर्मा और किशनलाल शर्मा ने लगातार कई बार जीत दर्जकर भाजपा की झोली में डाला था। 

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